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Bilaspur Education News: केंद्रीय विवि प्रशासनिक भवन में तालाबंदी, गेट के बाहर लेट गए कर्मचारी

Updated: | Fri, 18 Jun 2021 11:29 PM (IST)

बिलासपुर। Bilaspur Education News: गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के हाउसकीपिंग स्टाफ (सफाई कर्मी) वेतन मामले को लेकर 72 घंटे से हड़ताल पर है। शुक्रवार को भी आंदोलन अनवतरत जारी रहा। सुबह 10 बजे से प्रशासनिक भवन में तालाबंदी कर गेट सामने लेट गए। प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शाम पांच बजे तक प्रदर्शन किया। फिर भी अधिकारियों के कानों में जू तक नहीं रेंगा।

कर्मचारियों की मानें तो प्रशासनिक भवन में किसी को प्रवेश नहीं करने दिया गया है। भवन के मुख्य दरवाजे में ताला जड़ दिया गया है। महिलाएं बैठक रोजाना विरोध प्रदर्शन कर रहीं है। वहीं पुरूषों को प्रशासनिक भवन के पिछले दरवाजे की जिम्मेदारी मिली है। गेट के बाहर लेटकर कर्मचारी अपना विरोध प्रकट कर रहे हैं। तीन दिन से प्रशासनिक भवन में कामकाज ठप है। फिर भी अधिकारी कर्मचारियों की सुध लेने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। कोरोना महामारी के नाम पर उल्टा सुबह पहुंचकर वापस उल्टे पांव घर लौट जा रहे हैं।

कुलपति प्रो.अंजिला गुप्ता भी नजर नहीं आई। यही वजह है कि कर्मचारी प्रबंधन के खिलाफ अब उग्र प्रदर्शन की तैयारी में है। मीडिया सेल प्रभारी प्रो.प्रतिभा जे मिश्रा से आज भी मोबाइल पर संपर्क करने लगातार प्रयास किया लेकिन उनका काल रिसीव नहीं हुआ।

साफ सफाई तो दूर पानी पिलाने वाला नहीं

विश्वविद्यालय में साफ सफाई दूर पानी पिलाने वाला नहीं है। माली से लेकर सुरक्षा कर्मी भी पीछे हट गए हैं। दरसल कर्मचारी आइडियाज इन मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के अधीन चार साल से काम कर रहे हैं। वेतन को लेकर विगत दो साल से समस्या बनी हुई है। इस बार भी तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। उनकी आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। रीजनल लेबर कमीश्नर के कार्यालय में आवेदन के बाद भी समस्या बनी हुई है।

निजी कंपनी के नाम पर राजनीति

गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में सुरक्षा गार्ड और हाउसकीपिंग स्टाफ के वेतन में गड़बड़ी तब सामने आया जब कंपनी के हिस्सेदारों के बीच विवाद हुआ। पूर्व ठेकेदार अनिल बघेल ने मोर्चा खोल दिया। 15 करोड़ से अधिक की राशि में गड़बड़ी की पोल खोलते हुए मामले को पुलिस और न्यायालय तक ले गया। जिसमें दो हिस्सेदारों पर अभी केस चल रहा है। अनिल ने यहां तक कह दिया है कि इस मामले में विश्वविद्यालय के अधिकारी भी मिले हुए हैं। यही वजह है कि कर्मचारियों के आंदोलन की आग सुलगते ही सभी दुबक गए हैं और निजी कंपनी का नाम लेकर राजनीति कर रहे हैं।

Posted By: sandeep.yadav
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