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Bilaspur News: विशेष पिछड़ी जनजाति की महिलाओं द्वारा तैयार मधुरस एफएसएसएआइ के मानक पर उतरा खरा

Updated: | Sat, 23 Jan 2021 05:13 PM (IST)

बिलासपुर।Bilaspur News: सरगुजा क्षेत्र में विशेष पिछड़ी व सरंक्षित मांझी जनजाति की महिलाओं द्वारा पहली बार तैयार मधुरस को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ)ने अनुमोदन कर दिया है।इस जनजाति की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए प्रशासन ने ट्रायल के रूप में मधुमक्खी पालन से जोड़ा था।

यह ट्रायल सफल होने के बाद मैनपाट क्षेत्र में सर्वाधिक निवासरत मांझी-मझवार जनजाति की महिलाओं को मधुमक्खी पालन के व्यवसाय से जोड़ने की योजना बनाई गई है। व्यावसायिक रूप से मधुमक्खी पालन और मधुरस उत्पादन कराया जाएगा। इसकी ब्रांडिंग वही कराई जाएगी। पहली बार 46 किलोग्राम शहद निकालकर 13 हजार रुपये की कमाई महिलाओं ने की है।

ट्रायल सफल होने से प्रशासन भी उत्साहित है। पारंपरिक खेती-बाड़ी एवं रोजी-मजदूरी कर जीवनयापन करने वाली मैनपाट के मांझी जनजाति की महिलाएं अब बेहतर आय के साधन के रूप में मधुमक्खीपालन के व्यवसाय को अपना रही है। उर्मिला मांझी, राजवंती मांझी, सुकवारो मांझी सहित दस महिलाओं के द्वारा पहली बार 46 किलोग्राम शहद निकालकर 13 हजार रुपये की कमाई की है। जिले में मधुमक्खीपालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए उद्यानिकी विभाग द्वारा गोठानो से जुड़ी स्व सहायता समूह की महिलाओं के साथ ही व्यक्तिगत रूप से महिलाओं को निःशुल्क हनी बाक्स वितरित किया जा रहा है।

इसी कड़ी में मैनपाट जनपद के आदर्श गोठान कुनिया से जुड़ी सितारा स्व सहायता समूह की महिलाओं को पांच तथा ग्राम कुनिया के मांझी जनजाति की 9 महिलाओं को पांच-पांच नग हनी बॉक्स वितरित किया गया।कुल 50 हनी बाक्स से पहली बार मे उत्तम गुणवत्ता के 46 किलोग्राम शहद का उत्पादन हुआ है जिसे उद्यानिकी विभाग स्वयं 300 रुपये प्रति किलों की दर से खरीदा है। उप संचालक उद्यान केएस पैकरा ने बताया कि मैनपाट के आदर्श गोठान कुनिया के स्व सहायता समूह तथा ग्राम कुनिया के अन्य नौ महिलाओं को पांच-पांच नग मधुमक्खी बाक्स सहित एपिस मेलिफेरा प्रजाति के मधुमक्खी दिया गया है।

ब्रांडिंग और मार्केटिंग की होगी बेहतर व्यवस्था

कलेक्टर संजीव कुमार झा ने बताया कि मैनपाट में महिलाओं द्वारा मधुमक्खीपालन से उत्पादित शहद की गुणवत्ता उच्च मानक की है जिसका अनुमोदन भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा किया गया है। उन्होंने बताया कि यहाँ उत्पादित शहद के प्रसंस्करण के लिए तकनीकी विशेषज्ञों से परामर्श लेने उद्यानिकी एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। मैनपाट के शहद को अन्य राज्यों तक पहुंचाने के लिए विशेष ब्राडिंग की जाएगी तथा विपणन व्यवस्था भी बेहतर की जाएगी।

Posted By: anil.kurrey
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