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Negligence In Treatment: अस्पताल की दहलीज पर डेढ़ घंटे तक तड़पती रही संक्रमित महिला, मौत

Updated: | Thu, 06 May 2021 08:20 AM (IST)

बिलासपुर। Negligence In Treatment: संभागीय कोविड अस्पताल में इलाज कराने पहुंची कोरोना पीड़ित महिला गेट के बाहर आधे घंटे तक तड़पती रही, लेकिन गार्ड ने अंदर आने की अनुमति नहीं दी। किसी तरह अंदर पहुंची तो उसकी जांच कराने या भर्ती करने के लिए कोई नहीं आया। आखिरकार इलाज के अभाव में एक घंटे बाद महिला ने अस्पताल परिसर में ही दम तोड़ दिया। मानवता को शर्मसार करने वाली घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारी सफाई देने में जुट गए हैं।

बिल्हा के ग्राम धौड़ाभाठा निवासी महिला 55 वर्षीय श्याम बाई मानिकपुरी को बुधवार की सुबह सांस लेने में तकलीफ होने लगी। स्थिति गंभीर होने पर पुत्र दिनेश मानिकपुरी उन्हें लेकर बिल्हा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा। जहां पर श्याम बाई की कोरोना जांच की गई। उनकी रिपोर्ट पाजिटिव आई। इसके बाद बताया गया कि हालत गंभीर है। तत्काल संभागीय कोविड अस्पताल में भर्ती कराना होगा। इसके बाद एंबुलेंस की व्यवस्था कर उन्हें दोपहर में संभागीय कोविड अस्पताल भेजा गया।

लेकिन यहां पहुंचने पर अस्पताल के गार्ड ने तकरीबन आधे घंटे तक गेट ही नहीं खोला। गार्ड का कहना था कि उसे किसी मरीज के आने की सूचना नहीं है। इस दौरान दिनेश मां श्याम बाई की गंभीर हालत की जानकारी देते हुए गेट खुलवाने के लिए गिड़गिड़ाता रहा। इधर एबुंलेंस में श्याम बाई की हालत बिगड़ती जा रही थी।

इसी दौरान किसी ने श्याम को एसडीएम देवेंद्र पटेल का मोबाइल नंबर दिया। श्याम ने फोन कर एसडीएम को जानकारी दी। इसके बाद एसडीएम के फोन लगाने पर अस्पताल का गेट खोला गया। लेकिन अस्पताल परिसर के अंदर पहुंचने पर श्याम बाई को देखने या ले जाने कोई नहीं आया। दिनेश ने अस्पताल स्टाफ से सपंर्क किया तो उसे बताया गया कि कुछ देर में मरीज देखते के लिए स्टाफ आएगा।

लेकिन एक घंटे बीत जाने पर भी कोई नहीं पहुंचा और एंबुलेंस में ही तड़पते हुए उपचार के अभाव में श्याम बाई की मौत हो गई। घटना के बाद अधिकारी मामले को रफादफा करने में जुट गए हैं।

आसानी से नहीं खुलता है गेट

संभागीय कोविड अस्पताल का गेट आसानी से नहीं खुलता है। अस्पताल या स्वास्थ्य विभाग के किसी बड़े अधिकारी के आदेश पर भी मरीज को अंदर प्रवेश दिया जाता है। जबकि इस अस्पताल में जिलेभर के संक्रमित इलाज के लिए पहुंचते हैं। यदि मरीज के पास किसी अधिकारी की सिफारिश नहीं है तो उसका अस्पताल में प्रवेश करना असंभव है। जबकि ज्यादातर मरीज अचानक तबीयत बिगड़ने पर यहां पहुंचते हैं। यही वजह है कि रोजाना गेट में प्रवेश को लेकर विवाद होता है। अधिकतर मामले में मरीजों को वापस लौटा दिया जाता है।

क्रिटिकल बेड खाली नहीं, इसलिए नहीं पहुंचे

इस मामले पर अस्पताल के नोडल अधिकारी डा. अनिल गुप्ता ने कहा कि मरीज के अस्पताल परिसर में पहुंचने के बाद हाउस क्लीनिंग स्टाफ को जानकारी दी गई थी। उस समय अस्पताल में कोई क्रिटिकल बेड खाली नहीं होने के कारण मरीज को लेने कोई नहीं पहुंचा। साफ है कि चिकित्सकीय स्टाफ ने घोर लापरवाही की है। अस्पताल पहुंचने के बाद भी गंभीर मरीज की जांच करने के लिए भी कोई नहीं पहुंचा। अब अधिकारी जिम्मेदार पर कार्रवाई के बजाय उन्हें बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

बेटे को करते रहे गुमराह

श्याम बाई का पुत्र दिनेश मानिकपुरी बार-बार अस्पताल कर्मचारियों से संपर्क कर किसी डाक्टर को बुलाने या फिर उसे अंदर ले जाने की गुहार लगाता रहा। हर बार उसे यह बोलकर गुमराह किया जाता रहा कि पांच मिनट में चिकित्सकीय स्टाफ पहुंच जाएगा। लेकिन अंत तक श्याम बाई को देखने कोई नहीं पहुंचा। मरीज की मौत के बाद ही स्टाफ वहां पहुंचा।

Posted By: Yogeshwar Sharma
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