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Korba News: शहर में रोका छेका बंद, सड़कों में बढ़ा मवेशियों का जमावड़ा

Updated: | Thu, 17 Jun 2021 05:30 PM (IST)

Korba News: बिलासपुर-कोरबा। शहर में रोका छेका अभियान बंद होने से सड़कों में मवेशियों का जमावड़ा बढ़ गया है। नरवा गरूवा घुरूवा बारी योजना के तहत गांव गांव में मवेशियो के संरक्षण के लिए गोठान और चारागाह विकसित करने की योजना जारी है लेकिन चरागन भूमि के साथ चरवाहा सुनिश्चित नहीं होने स मवेशियों का शहर की ओर आने से रोकना चुनौती बनी है।

लाक डाउन के दौरान सड़के सुनी होने से यहां वहां भटक रहे मवेशियों को रोका छेका अभियान के तहत गोठानो ले जाया जा सकता था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अब लाक डाउन में छूट मिल गई है और लोगों का आवागमन शुरू हो चुकी है ऐसे में अभियान बंद होने से में मवेशियों का जमावड़ा यातायात के लिए खतरे का सबब बना है।

ग्रामीण क्षेत्रों मे चारागन भूमि अतिक्रमण के कारण लगातार सिमट रहा है। ऐसे मे मूक पशुओं में अब भटकाव की स्थिति निर्मित होने लगी है। शासन की ओर से नरवा गरूवा घुरूवा बारी योजना के तहत गायों के संरक्षण के लिए गोठान तैयार करने की योजना तो शुरू की गई है किंतु शहर के निकटवर्ती गांवों में जारी कार्यों में प्रगति नहीं है।

झगरहा, सोनपुरी, बुंदेली, नक्टीखार आदि आसपास ग्रामीण क्षेत्र के मवेशियों का जमावड़ा अब शहर में होने लगा है। ज्यादातर शहर के साप्ताहिक बाजारों में पशुओं देखा जा सकता है। शहर के कांजीहाउस की दशा इतनी बदहाल हो चुकी है कि यह अब बेसहारा पशुओं को रखने के काबिल नहीं रह गई है। यहीं वजह है कि शहर में बेखौफ घूमते आवारा पशुओ को आसानी से देखा जा सकता है। शहर के मवेशी के पालक इन्हें सड़कों पर ही छोड़ देते हैं। इन दुधारू पशुओं में सीमित मात्रा में बकरिया व अधिक मात्रा में गाय देखी जा रही हैं। जब गाय बछड़ा देती है, उस समय मवेशी पालक मेवशी की सुध लेते हैं। मवेशी को रखने की जगह नहीं होने की वजह से घर के सामने सड़क किनारे ही खूंटी लगाकर बांध दिया जाता है।

बरसात के समय में इन पशुओं के लिए झोपड़ीनुमा टेंट बनाकर उसमें रखा जाता है। जब ये मवेशी दूध देने में नाकाबिल हो जाते है, तो उन्हें सड़क में बेसहारा छोड़ दिया जाता है। चौक-चौराहों में ये पशु टहलते रहते है। रात होने पर सड़क के बीचोंबीच बैठ जाते है। जिससे आवागमन करने वाले यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सड़कों के अलावा आम बाजार में भी पशुओं के बेखौफ घुमने से भीड़ में समस्या बनी रहती है।

काऊ क्रेचर की उपयोगिता फीकी

नगर निगम द्वारा काऊ क्रेचर की खरीदी तो की गई है किंतु इसका उपयोग आवारा पशुओं को ढोने के बजाय कचरे डंपिंग के अलावा अन्य सामानों को ढोने के लिए किया जा रहा है। बहरहाल शहर में काऊ क्रेचर होने के बावजूद इसकी उपयोगिता सिद्ध नहीं हो रही है। यदि किसी तरह से पशुओं को कांजीहाउस तक हांक कर ले जाया भी जाए तो यह कांजीहाउस इस स्थिति में नहीं कि यहां 8 से 10 पशुओं को एक साथ रखा जाए।


खटाल संचालकों की अनदेखी

शहर में दर्जनों की तादाद में खटाल संचालकों द्वारा सड़क किनारे वाले स्थानों को खटाल का रूप देकर खटाल संचालन किया जा रहा है। संचालकों द्वारा दुधारू गायों को अपने पनाहगार में रखा जाता है। दीगर गायों को सड़कों पर आवारा घूमने के लिए छोड़ दिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में गोठान निर्माण के बाद कांजीहाउस का संचालन बंद हो चुकी है। ऐसे में जगह-जगह संचालित हो रहे खटाल संचालकों के मवेशियों पर कार्रवाई नहीं होती।

Posted By: sandeep.yadav
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