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Bilaspur News : गांव सरगुजा जिले में, पशु चिकित्सालय सूरजपुर जिले में

Updated: | Sun, 29 Nov 2020 09:52 AM (IST)

बिलासपुर। Bilaspur News : प्रशासनिक चूक की वजह से अंबिकापुर नगर निगम की सीमा से लगे ग्राम पंचायत अजिरमा के पशुपालक मुश्किल में फंसे हैं। यह ग्राम पंचायत सूरजपुर से सरगुजा जिले में शामिल तो हुआ, लेकिन यहां का पशु चिकित्सालय अब भी सूरजपुर जिले के अंतर्गत ही संचालित हो रहा है। यहां से जिला मुख्यालय सूरजपुर की दूरी 40 किलोमीटर है। इस विसंगति के कारण शासन की पशुपालन विभाग की योजनाओं से इस गांव के लोग वंचित भी रहते हैं।

जिला दूसरा हो जाने के कारण उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। इस पशु चिकित्सालय के अंतर्गत आसपास के पांच गांव आते हैं। विसंगति में सुधार के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक व्यवस्था में सुधार नहीं हो सका है। वर्ष 2008 में सरगुजा जिला विभाजन के बाद ग्राम पंचायत अजिरमा, सूरजपुर जिले में चला गया था। विभाजन से पहले यहां करीब 90 के दशक से शासकीय कृत्रिम गर्भाधान उपकेंद्र का संचालित था। इसी इलाके में अंबिकापुर का कृषि महाविद्यालय और अनुसंधान केंद्र एवं रेलवे स्टेशन भी था।

इसे देखते हुए लगातार लोगों की ओर से उठ रही मांग को देखते हुए अजिरमा पंचायत को करीब दो साल पहले पुनः सरगुजा जिले में शामिल कर लिया गया। इसके बाद उस इलाके में संचालित अन्य विभाग और संस्थान तो सरगुजा जिले मुख्यालय में शामिल हो गए, लेकिन अजिरमा स्थित पशु चिकित्सालय का संचालन आज भी सूरजपुर जिले के नाम से हो रहा है। यहां पदस्थ एक सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी एवं कार्यालय सहायक

पशु चिकित्सालय के अधीन हैं।

अजिरमा शासकीय पशु चिकित्सालय के अधीन पांच गांव का इलाका आता है। बड़ी संख्या में मवेशियों के उपचार एवं नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान यहां किया जाता है। इन गांवों में भगवानपुर, अजिरमा, ठाकुरपुर, बिशुनपुर और आमगांव शामिल हैं। इसमें सिर्फ एक गांव आमगांव ही वर्तमान में सूरजपुर जिले में है, बाकी सभी सरगुजा में शामिल हैं।

पशुपालकों को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ

अजिरमा पशु चिकित्सालय अंतर्गत आने वाले पांच गांव में बड़ी आबादी है। पशुधन की संख्या भी ज्यादा है। हालांकि, चिकित्सालय में पशुओं के उपचार सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध है। मगर, विभाग की शासकीय योजनाओं से इलाके के पशुपालक वंचित हैं। विभाग की ओर से चयनित ग्रामीणों को हर साल मुर्गा-मुर्गी, चूजे, बकरी वितरण किया जाता है। इसके अलावा पशुओं का पोस्टमार्टम और उसकी क्षतिपूर्ति के लिए भी अस्पताल की बड़ी भूमिका रहती है। ऐसे में दूसरे जिले के अधीन संचालित इस पशु चिकित्सालय का समुचित लाभ सरगुजा के मवेशी पालक नहीं उठा पा रहे हैं।

इस बारे में सूरजपुर जिले के पशु चिकित्सक डा. नृपेंद्र सिंह ने बताया कि अजिरमा पशु चिकित्सा उप केंद्र को सरगुजा जिले में शामिल करने के लिए संचालनालय के पास प्रस्ताव मार्च महीने में भेज दिया गया था। मगर, कोरोना संक्रमण के कारण काम अटक गया। अब संचालनालय से शासन के पास से होते हुए वित्त विभाग को फाइल भेजी जा रही है। इसके बाद ही इसे सरगुजा जिले में शामिल किया जाएगा। उम्मीद है कि अगले महीने तक इसकी स्वीकृति मिल जाएगी।

Posted By: Shashank.bajpai
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