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Bilaspur News: तन्मय की तकनीक से पीने योग्य बन जाएगा वाहन धुलाई में वेस्ट पानी

Updated: | Sat, 23 Jan 2021 05:14 PM (IST)

बिलासपुर।Bilaspur News: कोरबा जिले के होनहार छात्र तन्मय अग्रवाल ने एक ऐसी युक्ति निकाली है, जिसमें वाहनों की धुलाई के बाद दूषित होकर नालियों में बह जाने वाले पानी का उपचार कर पीने योग्य बनाया जा सकता है। इसके लिए उस पानी का एक विशेष विधि से उपचार करने की नई तकनीक पर उन्होंने पढ़ाई करते हुए इंजीनियरिंग के सातवें सैमेस्टर में काम किया और सफलता भी पाई।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) रायपुर से कैमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने वाले इस युवा का कहना है कि इस तकनीक का प्रयोग व्यावहारिक रूप से किया जाए, तो प्रतिदिन लाखों लीटर पानी बेकार होने से बचाया जा सकता है।

तन्मय ने बताया कि उनकी विकसित प्रणाली में सबसे पहले आटोमोबाइल से बेकार बह जाने वाला दूषित पानी एकत्र किया गया। उसके बाद उसमें प्राथमिक तौर पर पीने के पानी में मौजूद रहने वाले तत्वों की गणना की गई। इनमें बायोलाजिकल आक्सिडेंट डिमांड (बीओडी) व कैमिकल आक्सिडेंट डिमांड (सीओडी) का आंकलन किया गया। इन तत्वों को पानी में होना चाहिए, पर उनकी मौजूदगी की निर्धारित मात्रा जरूरी है, जो पीने पर लोगों की सेहत सही रखे। इनकी अधिकता नुकसान पहुंचा सकती है। वाहनों की धुलाई करने पर इन तत्वों की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है, जिसे अलग करने की एक नई प्रक्रिया पर काम किया गया।

इसके लिए पहले दूषित जल को इलेक्ट्रो कोकुलेशन की पहली विधि से गुजारा गया, जिसमें इलेक्ट्रोड के माध्यम से करंट प्रवाहित किया गया। एक निश्चित पैमाने का आंकलन किया गया कि उसमें से डस्ट पार्टिकल्स को अलग करने कितने समय तक कितने करंट व समय की जरूरत है। इसके बाद जब वे अलग हो गए, तो पानी को अलग कर लिया गया। उसके बाद उस पानी को एडजाप्शन की प्रक्रिया से गुजारा गया।

इस प्रक्रिया में ब्लैक कार्बन से ट्रीटमेंट किया, जिससे दूषित तत्वों की शेष मात्रा भी निकल गई। इस प्रक्रिया के बाद पानी को रिस्पांस सर्फेस मैथेडोलाजी (आरएसएम) प्रणाली से ग्राफ बनाया, जिससे यह पैमाना ज्ञात किया गया कि कुल कितना करंट कितनी समय तक और ब्लैक कार्बन की प्रक्रिया के लिए किस सीमा तक दूषित पानी का उपचार किया जाना चाहिए।

रायपुर शहर में छोटे-बड़े मिलाकर 200 वाशिंग प्वाइंट

तन्मय ने बताया कि उनकी शोध में केवल रायपुर शहर के ही वाशिंग प्वाइंट शामिल थे, जिनकी संख्या छोटे-बडे केंद्रों को मिलाकर 200 से अधिक है। बड़ी फ्रेंचाइजी वाले वाशिंग प्वाइंट में प्रतिदन महंगी रेंज वाली दस से 12 कारों की धुलाई होती है, जहां एक वाहन की सिर्फ वाशिंग में आधा घंटा और करीब 350 लीटर पानी नालियों में बह जाता है।

कई छोटे वाशिंग प्वाइंट में 20 से 20 कार व उतने ही बाइक की धुलाई की जाती है, जिसमें कम से कम प्रति धुलाई 10 से 15 लीटर पानी उपयोग कर लिया जाता है। इस तरह वाहनों के वाशिंग प्वाइंट में प्रतिदिन हजारों लीटर पानी बेकार बह जाता है, जिसका उपचार कर पीने या गार्डनिंग के लिए सदुपयोग किया जा सकता है।

कैमिकल इंजीनियरिंग में मेरिट, मिला गोल्ड मेडल

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) रायपुर से कैमिकल इंजीनियरिंग में इसी वर्ष स्नातक की डिग्री प्राप्त करने वाले तन्मय अग्रवाल ने मेरिट अंक प्राप्त किए हैं। उन्हें उनकी इस सफलता के लिए गोल्ड मेडल प्रदान किया गया है। तन्मय जिले के प्रतिष्ठित व्यवसायी सजन अग्रवाल व तारा अग्रवाल के पुत्र हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे तन्मय की सबसे बड़ी दीदी नेहा अग्रवाल हैं और एक बहन प्राची ने कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) का कोर्स पूरा किया है।

Posted By: anil.kurrey
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