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Workshop in Bilaspur: धान के बदले कृषि वानिकी अपनाने में ज्यादा फायदा

Updated: | Thu, 24 Jun 2021 10:40 AM (IST)

बिलासपुर। Workshop in Bilaspur: मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के क्रियान्वयन व प्रोत्साहन को लेकर बिलासपुर वनमंडल की ओर से बुधवार को वन चेतना केंद्र में एक दिवसीय कार्यशाला हुई। इसमें उपस्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के डा. केके चंद्रा ने कृषि वानिकी माडल पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि धान के बदले कृषि वानिकी अपनाई जाती है तो हितग्राहियों को ज्यादा लाभ मिलेगा। साथ ही पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।

कार्यशाला कलेक्टर सारांश मित्तर की उपस्थिति में हुई। आयोजन का मुख्य उद्देश्य योजना को प्रोत्साहित करना है। छत्तीसगढ़ में इमारती, गैर इमारती व अन्य प्रजातियों के पौधों के रोपण के लिए आदर्श परिस्थितियां व भूमि के अलावा अनुकूल जलवायु है। भविष्य में छत्तीसगढ़ राज्य काष्ठ के औद्योगिक उत्पादन व निर्यात में महत्वूर्ण भूमिका भी निभाएगा।

कार्यशाला के दौरान उपस्थित हितग्राहियों के प्रश्नों का जवाब भी दिया गया। उन्हें बताया गया कि इस योजना की खासियत है कि स्वयं की भूमि में पौधारोपण और कटाई के बाद परिवहन करने के लिए अनुज्ञा की अनिवार्यता नहीं रहेगी। इस योजना के तीन मुख्य घटक ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध राशि से सामुदायिक व शासकीय गैर वन क्षेत्रों में वाणिज्यक रोपण, संयुक्त वन प्रबंधन समिति द्वारा राजस्व भूमि पर वाणिज्यिक आधार पर पौधारोपण व धान की फसल के बदले पौधारोपण आदि के बारे में भी बताया गया। कार्यशाला में कलेक्टर के अलावा जिला पंचायत सीईओ हेरिस एस, वनमंडलाधिकारी कुमार निशांत, उप वनमंडलाधिकारी, वन परिक्षेत्र अधिकारी व बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित थे। सभी को पौधारोपण से होने वाले फायदों के बारे में विस्तार से बताया गया। इसके साथ ही उन्हें धान से किस तरह ज्यादा फायदेमंद है इसके बारे में भी जानकारी दी गई।

Posted By: sandeep.yadav
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