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Dantewada News : 700 साल के इतिहास में पहली बार दंतेश्वरी शक्तिपीठ सील

Updated: | Thu, 23 Jul 2020 01:32 PM (IST)

Dantewada News : योगेंद्र ठाकुर, दंतेवाड़ा (नईदुनिया)। सात सौ साल पहले काकतीय शासनकाल में स्थापित दंतेश्वरी शक्तिपीठ पहली बार सील किया गया है। मंदिर परिसर में निवास करने वाले एक श्रद्घालु के कोरोना पॉजिटिव आ जाने के बाद प्रशासन ने एहतियातन यह कदम उठाया है। पीढ़ियों से मंदिर में सेवा दे रहे जिया परिवार के सदस्य व पुजारी हरेंद्रनाथ जिया कहते हैं कि इतिहास में पहली बार हुआ है, जब शक्तिपीठ को सील किया गया है। मंगलवार से मंदिर में श्रद्धालुओं के आने पर रोक लगा दी गई है। परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है। परंपरा खंडित न हो इसलिए पुजारी पूजा-पाठ कर रहे हैं।

बता दें कि बस्तर का विश्व प्रसिद्ध दशहरा मां दंतेश्वरी पर केंद्रित है। कोरोना काल में अगर हालात नहीं सुधरे तो इस बार इसके आयोजन पर भी असर पड़ सकता है। जगदलपुर में आयोजित होने वाले दशहरा में शामिल होने दंतेवाड़ा से मांईजी की डोली व छत्र हर साल जाते हैं, जिसका स्वागत मावली परघाव रस्म के रूप में जगदलपुर में किया जाता है। लेकिन इस साल इस रस्म के पूरा होने में संशय है।

कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव से देवी दंतेश्वरी का मंदिर भी प्रभावित हुआ है। सोमवार की शाम जिले में मिले 27 कोरोना पॉजिटिव मरीजों में एक मंदिर परिसर निवासी श्रद्घालु भी शामिल है। उसका आवास मंदिर के करीब होने के कारण वह प्रतिदिन देवी दर्शन को आता था। प्रशासन ने कंटेनमेंट जोन के दायरे में मंदिर परिसर को भी रखा है। मंदिर के दरवाजे को बंद कर दिया गया है। 14 दिन के लिए मंदिर के साथ आसपास के इलाके भी सील रहेंगे। स्वास्थ्य अमला लगातार सर्वे कर रहा है। पुलिस की तैनाती भी इलाके में है।

मंदिर के पुजारी हरेंद्रनाथ जिया ने बताया कि सेवादारों को भी निश्चित समय पर ही परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई है। पिछले लॉकडाउन में मंदिर को बंद रखा गया था, लेकिन परिवार द्वारा देवी के स्नान, ध्यान और पूजा-पाठ के लिए हम पहुंचते रहे। चैत्र नवरात्र में श्रद्धालुओं के मनोकामना दीप प्रज्वलित नहीं किए गए। कई महत्वपूर्ण रस्मों की अदायगी भी प्रतीकात्मक हुई।

बस्तर दशहरा भी होगा प्रभावित

मंदिर के पुजारी और जानकारों का कहना है कि बस्तर दशहरा पूरी तरह से मांईजी को समर्पित और इसके इर्द-गिर्द रहता है। कोरोना संकट का यही हाल रहा तो बस्तर दशहरा भी प्रभावित होगा। इसमें दंतेवाड़ा से मांईजी की डोली जाकर शामिल होती है, जिसमें सैकड़ों की संख्या में स्थानीय आदिवासी अपने ग्राम्य देवी-देवताओं के प्रतीक चिन्ह के साथ शामिल होते हैं। इस साल संभवतः यह सब नहीं हो पाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network
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