अधर में लटकी नीमगांव तालाब को विकसीत करने की योजना

विदेशी मेहमान पक्षियों की अटखेलियों को निहारने की सुविधा उपलब्ध करा कर,पर्यटकों को आकर्षित करने की योजना,बीते दो साल से अधर में लटकी हुई है।

Updated: | Fri, 28 Jan 2022 10:41 PM (IST)

जशपुरनगर। सर्दी के मौसम में हिमालय की तराई से आने वाले विदेशी मेहमान पक्षियों की अटखेलियों को निहारने की सुविधा उपलब्ध करा कर,पर्यटकों को आकर्षित करने की योजना,बीते दो साल से अधर में लटकी हुई है। स्थानीय ग्रामीणों की आपत्ति के बाद,वनविभाग की इस पहल को आगे बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। योजना के अधर में लटकने से विदेशी मेहमानों का आशियाना नीमगांव तालाब में बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी ग्रहण लग गया है।

जानकारी के लिए बता दें कि शहर से तकरीबन 20 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत नीमगांव में जलसंसाधन विभाग के तालाब में सर्दी के दस्तक के साथ ही विदेशी पक्षियों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। जिले में ये पंंछी हिमालय क्षेत्र से हजारों किलोमीटर का लंबा सफर कर प्रतिवर्ष दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक यहां पहुुंचते हैं। करीब तीन माह समय बिताने के बाद पक्षी यहां से ओड़िसा के चिलका झील की ओर रवाना हो जाते हैं। इस साल दिसंबर के दूसरे सप्ताह में ही पक्षियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। इस मौसम में जलाशय में भरपूर पानी भरा हुआ रहता है। उल्लेखनीय है कि हर साल नीमगांव जलाशय में सेलडक (ब्रासनी डक) बारहेडेडगिज (राजहंस), पिनटेल, उलेंड हेडेड स्टार, लिटिल कार्बोरेटग्रेव यहां पहुंचते हैं।

परवान नहीं चढ़ सका बर्ड वाच सेंटर की योजना

विदेशी मेहमानों के इस पंसदीदा तालाब को पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसीत करने के लिए वन विभाग ने तकरीबन 2 साल पूर्व बर्ड वाच केन्द्र के रूप में विकसीत करने की योजना तैयार की थी। इस योजना में तालाब को चारों ओर से कंटीले तार से सुरक्षित कर,तालाब के बीच में कृत्रिम टापू बनाने की थी,ताकि जलक्रीड़ा के बाद,पक्षियां इस टापू में सुरक्षित रूप से आराम कर सके और अंडें दे सके। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए दूरबीन,वाच टावर के साथ पक्षियों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक दस्तावेज और चित्र प्रदर्शनी की व्यवस्था की जानी थी। लेकिन जैसे ही वनविभाग के प्रस्ताव की भनक स्थानीय ग्रामवासियों को हुई,वे इसके विरोध में लामबंद हो गए। वर्ष 2020 में कलेक्टर को सौपें गए ज्ञापन में स्थानीय रहवासियों ने तालाब की घेराबंदी कर दिए जाने से मवेशियों के लिए पानी की कमी होने की आशंका जताई थी। हालांकि वनविभाग का कहना था कि तालाब के किनारे में मवेशियों के पानी पीने के लिए जगह छोड़ा जा सकता है,लेकिन,फिलहाल,ग्रामीणों की आपत्ति को दूर करने के लिए न तो प्रशासन की ओर से पहल की गई है और ना ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पहल की है।

फोटो विदेशी मेहमानों के सुरक्षा की नहीं है ठोस योजना

नीमगांव तालाब में पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधा के साथ ही मेहमान पक्षियों की सुरक्षा के इंतजाम भी नहीं किया गया है। हालांकि,वनविभाग का दावा है कि वन अधिकारी व कर्मचारियों के साथ ग्राम वन सुरक्षा समिति के माध्यम से मेहमान पक्षियों की सतत निगरानी की जाती है। लेकिन मार्च 2020 में लाकडाउन के दौरान यहां पक्षियों का शिकार कर,पिकनीक मनाने की घटना ने पक्षियों की सुरक्षा पर जो गंभीर सवाल उठाए थे,वह आज भी यथावत हैं। इस मामले में वनविभाग ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार करते हुए,शिकार के लिए प्रयोग किए गए बंदूकों को जब्त किया था।

Posted By: Yogeshwar Sharma