Korba News: देश की सबसे बड़ी कोयला खदान को केंद्र की दो टूक, पहले हरियाली फिर विस्तार

Updated: | Mon, 20 Sep 2021 12:45 AM (IST)

कोरबा Korba News:। साउथ इस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की गेवरा कोयला खदान के 700 लाख टन विस्तार पर पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने ब्रेक लगा दी है। उर्जा की आवश्यकता व पर्यावरण संरक्षण में संतुलन बनाने की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए कहा गया है कि पहले खदान प्रभावित क्षेत्र में प्रदूषण की रोकथाम के लिए पौधारोपण करें।

छत्तीसगढ़ में संचालित कोल इंडिया लिमिटेड से संबद्ध एसईसीएल की गेवरा खदान की वर्तमान उत्पादन अनुमति 490 लाख टन है। अभी चार माह पहले ही इसकी अधिकृत पर्यावरणीय अनुमति प्रदान की गई है। कम अवधि में ही प्रबंधन ने विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की 18 वीं वर्चुअल बैठक में 490 से बढ़ा कर 700 लाख टन कोयला उत्पादन की अनुमति का प्रस्ताव रखा। बैठक की जारी की गई मिनट्स के अनुसार फिलहाल इस प्रस्ताव को टाल दिया गया है।

बताया जा रहा है कि खदान क्षेत्र 4184.48 हेक्टेयर से 4781.78 हेक्टेयर विस्तार का प्रस्ताव रखा गया था। पर्यावरणीय सहायक कमेटी के सदस्य एनपी शूला ने प्रबंधन को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने की बात कहते हुए प्रभावित क्षेत्र में पौधारोपण करने कहा है। एसईसीएल के जनसंपर्क अधिकारी डा. सनीश चंद्र का कहना है कि देश की सबसे बड़ी (उत्पादन क्षेत्र में) गेवरा कोयला खदान को वित्तीय वर्ष 2020-21 में एक लाख पौधारोपण का लक्ष्य दिया गया था, जिसे पूरा कर लिया गया है। नए वित्तीय वर्ष के लक्ष्य पर भी काम किया जा रहा। एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञों की समिति गेवरा क्षेत्र का दौरा करेगी। जिसमें पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह समिति विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के चेयरमैन की अगुवाई में वास्तविक हालात का जायजा लेगी।

तीन गांव की जमीन होगी अधिग्रहित

गेवरा खदान के विस्तार के लिए तीन गांव सलोरा, पंडरीपानी व बरभाठा की जमीन भी अधिग्रहित की जानी है। इस क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पहले पूर्व में अधिग्रहित की गई जमीन के एवज में मिलने वाले मुआवजा, पुनर्वास व नौकरी के लंबित मामलों का निपटारा किया जाए। उसके बाद आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जाए। इस पर भी विशेषज्ञ समिति ने संज्ञान लेते हुए प्रभावितों के लंबित मामलों को निराकृत करने कहा है।

10 हजार लाख टन की मूल योजना

कोल इंडिया ने वित्तीय वर्ष 2023-24 तक 10 हजार लाख टन कोयला उत्पादन की मूल योजना तैयार की है। एसईसीएल की भागीदारी 2500 लाख टन रहेगी। इसमें गेवरा, कुसमुंडा व दीपका की भूमिका अहम रहेगी। पावर सेक्टर से कोयले की मांग बढ़ गई है, इसलिए उत्पादन बढ़ाने का दबाव है। यही वजह है कि गेवरा खदान का विस्तार का प्रस्ताव 490 से बढ़ा कर सीधे 700 लाख टन रखा गया है।

Posted By: Yogeshwar Sharma