मुंगेली जिले में आरटीपीसीआर टेस्ट नहीं, समस्या

जिले में तीसरी लहर की शुरूआत के साथ ही कोरोना मरीज बढ़ने लगे हैं।

Updated: | Mon, 24 Jan 2022 12:34 AM (IST)

मुंगेली । कोरोना से बचाव के साथ-साथ करोना की जांच के लिए मुख्यमंत्री की घोषणा भी पूरी नहीं हो पाई है इसके चलते जिले में आरटीपीसीआर टेस्ट नहीं होने से अभी भी कोरोना के सैंपल जांच के लिए कभी बिलासपुर तो कभी रायपुर लैब में भेजा जाता है। प्रस्ताव भेजे जाने के बाद शुरू हुई है।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी जिले में वायरोलजी लैब शुरू करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। जिले में आरटीपीसीआर टेस्ट नहीं होने से अभी भी कोरोना के सैंपल जांच के लिए कभी बिलासपुर तो कभी रायपुर लैब में भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट आने में ही चार से पांच दिन लग जाते हैं। कोरोना संक्रमण के समय सैंपल अधिक होने से दस से 12 दिन बाद भी रिपोर्ट नहीं आ पाती है।

इसके कारण समय पर मरीज चिह्वांकित नहीं हो पाते हैं। इसके चलते कोरोना संक्रमण का फैलाव और बढ़ते ही जा रहा है। भर के भीतर जिले में कोरोना की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। पिछले सप्ताह जिले में सौ से संक्रमित मरीजों की पहचान की गई है। दूसरी लहर के समय प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जिले में आरटीपीसीआर टेस्ट की अधिक सुविधा के लिए वायरोलजी लैब खोलने की घोषणा की थी। अधिकारियों के रूचि नहीं लेने से मुख्यमंत्री की घोषणा केवल घोषणा बनकर रह गई है। घोषणा को अमलीजामा पहनाने के लिए अधिकारियों द्वारा कोई प्रयास नहीं किया गया है। हालांकि जिले से दो से तीन बार इस संदर्भ में प्रस्ताव ऊपर भेजा जा चुका है। किंतु अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिले में तीसरी लहर की शुरूआत के साथ ही कोरोना मरीज बढ़ने लगे हैं।

घरों घर सर्दी, खांसी एवं बुखार से पीड़ित लोग कोरोना की जांच न कराकर दवा दुकानों से सर्दी बुखार की दवा लेकर खा रहे हैं। कोरोना की जांच नहीं कराने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। जिला अस्पताल एवं शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दो स्थानों पर कोरोना जांच की सुविधा उपलब्ध है। जांच केंद्र में रेपिड एंटीजन जांच, ट्रूनाट तथा आरटीपीसीआर किट से कोरोना की जांच की जाती है। कई मरीजों में रेपिड एंटीजन जांच से परफेक्ट रिपोर्ट नहीं मिल पाती। इससे समय पर मरीज चिह्वांकित नहीं हो पाता, हालांकि एंटीजन टेस्ट से जांच तो शुरू हो जाती है, लेकिन सिम्टोमेटिक लोगों को आरटीपीसीआर टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। कोरोना संक्रमण के समय सैंपल अधिक होने से 10 से 12 दिन बाद भी रिपोर्ट नहीं आ पाती। इससे समय पर मरीज चिह्वांकित नहीं हो पाता। जिसके चलते कोरोना संक्रमण का फैलाव होता है।

क्या कहते हैं अधिकारी

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. टीएन महिंग्लेश्र्वर ने बताया कि जिले में वायरोलजी आरटीपीसीआर लैब का काम शुरू नहीं हो पाया है। वर्तमान में आरटीपीसीआर का सेंपल बिलासपुर एवं रायपुर लैब में जांच के लिए भेजा जाता है।

इस संबंध में कलेक्टर अजीत वसंत ने बताया कि जिले में आरटीपीसीआर लैब प्रारंभ करने के लिए दो-तीन बार प्रस्ताव भेजा जा चुका है। शासन स्तर का मामला है प्रस्ताव स्वीकृत होते ही इस पर कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

Posted By: Yogeshwar Sharma