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Corona Treatment: कोरोना में आयुर्वेद 100 फीसद सफल, अंग्रेजी के दबाव में सरकारी की स्वीकृति नहीं

Updated: | Fri, 07 May 2021 10:02 PM (IST)

रायपुर। कोरोना के हल्के और माध्यम लक्षणों वाले मरीजों के इलाज में आयुर्वेद 100 फीसद सफल रहा है। मगर, केंद्र सरकार की तरफ से दिशानिर्देश के बावजूद अंग्रेजी पद्धति के दबाव में राज्य सरकार ने आयुर्वेदिक पद्धति को कोरोना के इलाज की अनुमति नहीं दी है। जबकि अखिल भारतीय आयुर्वेद साइंस दिल्ली में इस पद्धति से बाकायदा इलाज कर मरीजों को स्वास्थ्य किया जा रहा है। वहीं मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, गुजरात समेत अन्य राज्यों ने कम व माध्यम संक्रमण वाले मरीजों का आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से इलाज की अनुमति दी है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर शिवनारायण द्विवेदी का कहना है कि किसी भी चिकित्सा पद्धति के पास अब तक कोरोना की दवाई नहीं है। आयुर्वेदिक पद्धति से हल्के और मध्यम संक्रमितों का 100 फीसद सफल इलाज हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या काफी अधिक है। महामारी तेजी से बढ़ता ही जा रहा है।

पहले ही राज्य डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। राज्य सरकार द्वारा अनुमति देने के बाद आयुर्वेदिक पद्धति से मरीजों का बेहतर इलाज किया जा सकेगा। चिकित्सकों ने बताया कि आयुर्वेदिक पद्धति के तहत लोग इलाज को अपना रहे हैं। जिन राज्यों में अनुमति दी गई है। वहां काफी संख्या में कोरोना मरीज स्वस्थ हो रहे हैं।

ऐसे में इस पद्धति को राज्य में अनुमति प्रदान करने से सीधा लाभ लोगों मिलेगा। आयुर्वेदिक के चिकित्सकों का इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव संचालक समेत अन्य अधिकारियों से बैठक भी हो चुकी है। मगर, अब तक मामला अटका पड़ा है।

700 शासकीय आयुर्वेदिक डॉक्टर जुटे

विभागीय जानकारी के मुताबिक, राज्य में करीब 700 आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं। शासन द्वारा इनसे कोरोना मरीजों के इलाज में सेवाएं ली जा रही है। बकायदा कोविड अस्पतालों में ड्यूटी लगाई जा रही है। मगर, उनकी ही पद्धति से डॉक्टरों को इलाज की अनुमति न मिलना दोहरी मानसिकता को प्रदर्शित करता है।

300 से अधिक आयुर्वेदिक डॉक्टर अस्पतालों में कार्यरत

विशेषज्ञों ने बताया कि राज्य में 4356 आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं। वहीं 500 से अधिक डाक्टर प्राइवेट अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं, जो पूरी तरह एलोपैथी पद्धति से ही इलाज की सेवाएं देते हैं। चिकित्सकों का मानना है कि इसमें अधिकांश आयर्वेदिक चिकित्सक शासन द्वारा अवसर न मिलने की वजह से रोजगार के लिए अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं तो कुछ ऐसे भी हैं। इधर, राज्य में 2277 होम्योपैथी चिकित्सक भी अपनी पद्धति से मरीजों को लाभ दे रहे हैं।

सूरजपुर में आयुर्वेदिक पद्धति से दवा पर रोक

बता दें सूरजपुर जिला स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में कोरोना मरीजों को एलोपैथी के अलावा किसी भी अन्य पद्धति के तहत दवा न लेने को लेकर आदेश जारी किया था। जिसे आयुष के डाक्टरों के विरोध के बाद फैसले को वापस लेना पड़ा था।

वर्जन

आयुष मंत्रालय के रिसर्च के बाद केंद्र ने आयुर्वेदिक पद्धति से कोरोना के इलाज को गाइड लाइन में शामिल किया है। आयुर्वेदिक दवाओं का उपयोग से कोरोना पीड़ितों को 100 फीसद लाभ मिल रहा। शासन भी पहले ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक दवाओं या उपायों को करने की अनुमति दी है। लेकिन अधिकारियों और अन्य चिकित्सकों के भ्रम फैलाने की वजह से अब तक अनुमति नहीं मिली है।

- डॉक्टर शिवनारायण द्विवेदी, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक चिकित्सा संघ

वर्जन

कोरोना के हल्के और मध्यम रोगियों के लिए आयुर्वेद में पर्याप्त उपचार है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं का उपयोग किया जा रहा है। लेकिन राज्य में पद्धति से इलाज को पूर्ण मान्यता नहीं है। जबकि दिल्ली, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र ओडिशा में कोरोना हल्के और मध्यम मरीजों के इलाज के लिए आयुर्वेद को मान्यता दी गई है।

- डॉक्टर हरीन्द्र मोहन शुक्ला, अध्यक्ष, अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन छत्तीसगढ़

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स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक हुई थी। इसमें विभाग ने आयुर्वेदिक पद्धति से कोरोना के इलाज की अनुमति देने की बात कही थी। इसके साथ है कई बार विभाग के साथ ही राज्य शासन को स्वीकृति प्रदान करने निवेदन किया गया। लेकिन अनुमति नहीं मिली। जबकि शासकीय आयुर्वेदिक डाक्टरों से कोरोना इलाज में ड्यूटी ले रहे यह तो दोहरी मानसिकता है। किसी लॉबी के दबाव में ही अब तक आयुर्वेद से इलाज को मान्यता नहीं दी गई है।

- डॉक्टर नरेंद्र सिंह भुवाल, अध्यक्ष, सोसाइटी ऑफ क्लीनिकल आयुर्वेदा छत्तीसगढ़

वर्जन

आयुर्वेदिक नुस्खे जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। उसके लिए विभाग ने पत्र जारी कर अनुमति दी है। आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज को हमने अनुमति नहीं दी है। लेकिन रोक भी नहीं है। माध्यम और हल्के लक्षणों वाले कोविड मरीज चाहे तो इस पद्धति से इलाज करा सकते हैं।

- डॉक्टर सुभाष मिश्रा, राज्य नोडल अधिकारी, कोरोना नियंत्रण अभियान

Posted By: Shashank.bajpai
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