कृषि विवि के वैज्ञानिक डा. दीपक शर्मा को जियोग्राफिकल इंडिकेशन के लिए मिली जिम्मेदारी

Updated: | Mon, 27 Sep 2021 01:12 PM (IST)

रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भारत सरकार ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डा. दीपक शर्मा को भौगोलिक सूचक (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) विशेषज्ञ के रूप में नामांकित किया है। अनुवाशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग में पदस्थ डा. शर्मा को भारत सरकार के जियोग्राफिकल इंडिकेशन, बौद्धिक संपदा विभाग, नई दिल्ली द्वारा कृषि के क्षेत्र में भौगौलिक सूचक (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) विशेषज्ञ सदस्य के रूप में 29 सितंबर, 2021 को होने वाली बैठक के लिए चयनित किया गया हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य से पहली बार किसी वैज्ञानिक को बौद्धिक संपदा विभाग भारत सरकार द्वारा जियोग्राफिकल इंडिकेशन विशेषज्ञ के रूप में नामांकित किया गया है। डा. दीपक शर्मा जिराफूल धान की किस्म को सरगुजा जिले के लिए भौगोलिक सूचक दिलाने में फेसिलिटेटर रह चुके हैं और नगरी दुबराज चावल को भी जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग दिलाने में फेसिलिटेट कर रहे हैं।

29 सितंबर 2021 को होने वाली बैठक में कृषि के क्षेत्र में जीआई टैग के आवेदनों का परीक्षण, सुझाव एवं मार्गदर्शन करेंगे। जियोग्राफिकल इंडिकेशन एक प्रकार का बौद्धिक संपदा अधिकार होता हैं, जिसमें किसी भी उत्पाद की गुणवत्ता एवं महत्व वहां के भौगोलिक वातावरण के कारण होती हैं। इसमें उस उत्पाद की उत्पत्ति स्थान को प्राथमिकता दी जाती हैं।

बता दें कि डाॅ. दीपक शर्मा ने बताया कि प्रदेश में उत्परिवर्तन प्रजनन के माध्यम से प्रदेश की 50 से अधिक धान की देशी प्रजातियों में सुधार एवं नवीन किस्मों का विकास कार्य करा चुके हैं। इस दौरान 25 से अधिक म्यूटेन्ट विकसित किए गए जिनका प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है। धान की पांच म्यूटेन्ट किस्में - ट्राॅम्बे छत्तीसगढ़ दुबराज म्यूटेन्ट-1, विक्रम टी.सी.आर., सी.जी जवांफूल ट्राॅम्बे, ट्राॅम्बे छत्तीसगढ़ सफरी म्यूटेन्ट जारी एवं अधिसूचित की गई हैं।

25 से अधिक रेडी-टू ईट और रेडी-टू कुक खाद्य उत्पादों को विस्तारित शेल्फलाइफ के साथ जारी किया गया। धान की परंपरागत किस्मों लाईचा, महाराजी और गठवन में कैंसर रोधी और सूजन रोधी गुणों के लिए सक्रिय तत्वों की पहचान की गई है। छत्तीसगढ़ के औषधीय और सुगंधित पौधों में सक्रिय तत्वों की पहचान की गई है।

गुलदाऊदी, डहेलिया और ग्लेड्योली की विभिन्न किस्मों के फूलों के रंगों में भिन्नता का विकास किया गया है। इनके नेतृत्व में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कई विद्यार्थियों ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में अपना शोध कार्य पूर्ण किया।

Posted By: Shashank.bajpai