जहरीला पानी पीकर बीमार हो रहे ग्रामीणों के लिए संजीवनी बनेगा बार्क

Updated: | Sat, 27 Nov 2021 07:40 AM (IST)

संदीप तिवारी (रायपुर, नईदुनिया)। आर्सेनिक, फ्लोराइड व आयरन जैसे जहरीले तत्वों से बीमार हो रहे राज्य के बस्तर, गरियाबंद, कोरबा, रायगढ़ और महासमुंद के लोगों को निश्शुल्क वाटर फिल्टर देने की तैयारी चल रही है। भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर (बार्क), मुंबई के वैज्ञानिकों की सिफारिश पर केंद्र सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग ने इस संबंध में पहल की है। वैज्ञानिकों का दल ही वाटर फिल्टर वितरण से लेकर उनके शुरुआती संचालन की निगरानी करेगा। विकल्प के अभाव में जहरीले भू-जल का उपयोग करने से कई गांवों के लोग बीमार हैं। मौतें भी होती रहती हैं।

राज्य के गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा में भू-जल में आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने के कारण किडनी की बीमारी से वर्ष 2009 से अब तक 72 लोगों की जान जा चुकी है। अभी भी 15 लोग पीड़ित हैं। फिलहाल इस गांव के 200 परिवारों को वाटर फिल्टर देने का बजट बनाया गया है। एक वाटर फिल्टर की कीमत औसतन पांच हजार रुपये है। पहले चरण में प्रदेश के सबसे अधिक प्रभावित 10 गांवों को चुना गया है।

इनमें गरियाबंद के देवभोग विकासखंड के अंतर्गत आने वाले गांव दरलीपारा, महूकोट, ननगलदेही, पितापारा, घुमारगुडा, छिछिया, गिरसुल और केंदूपाती श्ाामिल हैं। यहां के करीब एक हजार परिवारों को बार्क की इस पहल का लाभ मिलेगा। राज्य के अन्य जिलों में भी सर्वे जारी है। जल्द ही सूची बार्क को भेज दी जाएगी।

जहरीले रसायनों के दुष्प्रभाव

फ्लोराइड: विशेषज्ञों के मुताबिक पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने से यह फ्लोरोसिस पैदा करता है। इसका असर दांतों और हड्डियों पर होता है। यह गर्दन, पीठ, कंधे और घुटनों के जोड़ों व हड्डियों को प्रभावित करता है। इससे कैंसर, स्मरण शक्ति कमजोर होना, गुर्दे की बीमारी व बांझपन की समस्या होती है।

आयरन: आयरन की अधिकता वाले पानी को पीने से दांत काले हो जाते हैं। यह पाचन क्रिया को सबसे अधिक प्रभावित करता है।

आर्सेनिक: इससे प्रदूषित पेयजल को पीने से मानव शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इससे त्वचा, फेफड़े, मूत्राशय, गुर्दे और यकृत कैंसर सहित कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

बार्क ने मांगी है राज्य सरकार से रिपोर्ट

बार्क के वैज्ञानिक डा. सौमित्रा कर के मुताबिक बार्क ने छत्तीसगढ़ के उन गांवों की भू-जल गुणवत्ता की रिपोर्ट मांगी है, जहां आर्सेनिक, फ्लोराइड व आयरन की अधिकता है। प्रभावित गांवों के परिवारों की संख्या भी मांगी गई है। सरपंच से अनुमति लेने के बाद वाटर फिल्टर बांटा जाएगा।

कृषि विज्ञानियों के प्रस्ताव पर काम शुरू

प्रदेश में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के साथ बार्क का पहले से ही करार है। यहां कई तरह के कार्य के लिए संयुक्त अनुसंधान भी चल रहे हैं। बार्क के सामने कृषि विवि के कुलपति डा. एसएस सेंगर और यहां के पादप अनुवांशिकी एवं प्रजनन विभाग के प्रमुख कृषि विज्ञानी डा. दीपक शर्मा ने वाटर फिल्टर बांटने का प्रस्ताव रखा था। डा. शर्मा ने बताया कि बार्क और प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग के साथ मिलकर इसके लिए कार्ययोजना तैयार की गई है।

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लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग, छत्तीसगढ़ के मुख्य अभियंता टीजी कोसरिया ने बताया कि बार्क ने प्रदेश के उन गांवों की सूची मांगी है, जहां के भू-जल में फ्लोराइड, आर्सेनिक या अन्य हानिकारक तत्वों की अधिकता है। कुछ गांवों की सूची हमने दे दी है। बाकी का सर्वे जारी है। बार्क द्वारा ही यहां वाटर फिल्टर आदि वितरण की योजना है।

Posted By: kunal.mishra