छत्तीसगढ़ में मीसाबंदी की पेंशन बहाली के कोर्ट के फैसले को भाजपा ने कांग्रेस के तुगलकी फैसले की जीत बताया

पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कोर्ट के फैसले के बाद भूपेश सरकार पर निशाना साधा है।

Updated: | Wed, 26 Jan 2022 10:31 AM (IST)

रायपुर (राज्य ब्यूरो) छत्तीसगढ़ में मीसाबंदियों की पेंशन को लेकर आए कोर्ट के फैसले के बाद बयानों का दौर शुरू हो गया है। लोकतंत्र सेनानी संघ ने कोर्ट के फैसले को न्याय की जीत बताया है। वहीं कांग्रेस ने यह कहकर पलटवार किया है कि मीसाबंदियों को नैतिकता के आधार पर पेंशन नहीं लेना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने कोर्ट के फैसले के बाद भूपेश सरकार पर निशाना साधा है। मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि यह मीसाबंदियों की एतिहासिक जीत है। कोर्ट ने पहले भी पेंशन देने पर फैसला दिया था, लेकिन भूपेश सरकार ने तानाशही दिखाते हुए इसे स्वीकार नहीं किया। अब एक बार फिर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तुगलकी फैसले पर प्रजातंत्र की जीत हुई है। लोकतंत्र सेनानी संघ के सच्चिदानंद उपासने ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद पेंशन बंद करने का निर्णय लिया गया था, जो कि गलत साबित हुआ।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आखिर मीसाबंदियों को किस बात की पेंशन दी जाए? उन्होंने कोई आजादी की लड़ाई तो लड़ी नहीं। मीसाबंदियों ने देश की जनता द्वारा निर्वाचित सरकार के खिलाफ आंदोलन किया था। तब सरकार ने तत्कालीन जरूरतों के अनुसार संवैधानिक प्रविधानों के अनुरूप निर्णय लिया। उस समय के विपक्षी नेताओं और विरोधी राजनीतिक दलों को सरकार के निर्णय से असहमति थी। विरोधी दलों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाया था। आंदोलन हिंसक भी था। सरकार ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ लोगों को जेलों में भेजा। यह विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलन था। सरकार के खिलाफ असहमति के आधार पर हुए राजनीतिक आंदोलन के लिए राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को पेंशन दिया जाना गलत है।

Posted By: Sanjay Srivastava