Chhattisgarh Medicinal Plants News: छत्‍तीसगढ़ के औषधीय पौधों में विशेष गुणों की पहचान के लिए होगा अनुसंधान

Updated: | Sat, 31 Jul 2021 03:05 PM (IST)

रायपुर ( नईदुनिया प्रतिनिधि ) । Chhattisgarh Medicinal Plants News: छत्तीसगढ़ राज्य के वनों में पाए जाने वाले औषधीय पौधों के गुणों का विश्लेषण और प्रमाणीकरण करने के लिए भाभा परमाणु अनुसंधान संस्थान, मुंबई द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की एक परियोजना स्वीकृत हुई है। औषधीय पौधेे जैसे बच, मामफल, केऊकंद, चरोटा, काली मूसली, तिखुर, कालमेघ समेत प्रदेश में पाए जाने वाले अन्य महत्वपूर्ण औषधीय पौधों को छत्तीसगढ़ के तीनों जलवायविक क्षेत्रों सरगुजा, बस्तर और मैदानी क्षेत्रों से एकत्रित किया जाएगा। इसके साथ ही इन औषधीय पौधों में पाए जाने वाले रासायनिक तत्वों का विश्लेषण किया जाएगा।

बताया जाता है कि इस परियोजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले महत्वपूर्ण औषधीय पौधों के रासायनिक तत्वों पर अनुसंधान कार्य करते हुए विज्ञानिक तरीके से औषधीय पौधों में पाए जाने वाले विशेष तत्वों की खोज की जाएगी और इसके बाद इसका प्रमाणीकरण किया जाएगा। वहीं अनुसंधान कार्याें से यह पता लगाया जाएगा कि विभिन्न प्रकार के जलवायविक परिस्थितियों में रासायनिक तत्वों में क्या बदलाव आते हैं। इसके अलावा कौन से क्षेत्र के किन पौधों में औषधीय रूप से महत्वपूर्ण रासायनिक तत्व ज्यादा पाए जाते हैं। इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए डा. एसएस टुटेजा को प्रमुख अन्वेषक और सह-अन्वेषक डा. एसएल स्वामी और डा. धर्मेंद्र खोखर को बनाया गया है। परियोजना में अनुसंधान कार्य भाभा परमाणु अनुसंधान संस्थान के डा. एके बौरी के मार्गदर्शन में किया जाएगा। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में विभिन्न प्रकार के लगभग 200 किस्मों के औषधीय और सुगंधित पौधों को लगाया गया है।

Posted By: Kadir Khan