नईदुनिया गुरुकुल : बच्चों को ऐसी शिक्षा और संस्कार देने चाहिए जो पर्यावरण का संरक्षण कर सके

Updated: | Thu, 21 Oct 2021 02:40 PM (IST)

रायपुर। Naidunia Gurukul: जीवन की भागदौड़ मे आज हम मूल्य विहीन होते जा रहे हैं। अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के नाम पर अति महंगे विद्यालय में दाखिला दिलाकर हम संतुष्ट और निश्चिंत हो जाते हैं। मेरा मानना है कि बच्चों को ऐसी शिक्षा और संस्कार देने चाहिए जो पर्यावरण का संरक्षण कर सके और जिससे आने वाली पीढ़ी को भी जीवन मिल सके। खामोशी से भी कर्म होते हैं।

मैंने देखा है...पेड़ों को छाया देते हुए

प्राथमिक कक्षाओं में ही वृक्षारोपण और उनका संरक्षण का महत्व छात्र-छात्राओं को आसानी से सिखाया जा सकता है। हाल के दिनों की ही बात करें, तो कोरोना ने सभी की सांसे रोक दी थी। जिंदगी बचाने के लिए हजारों रुपयों में भी ऑक्सीजन का मिलना और जिंदगी का बचना सिर्फ भगवान भरोसे ही तो था! इसलिए हर शाला का, हर शिक्षक का यह दायित्व है कि अपने विद्यार्थियों को हर वर्ष एक पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने हेतु प्रेरित करें। पेड़ न सिर्फ हमें ऑक्सीजन देते हैं बल्कि वायु, जल और भूमि को भी शुद्ध एवं संरक्षित करते हैं।

मेरा मानना है कि असंभव को भी संभव आपकी सोच बनाती है। यहां तो सिर्फ एक पेड़ लगाने की बात है। आलीशान बंगलों में रहने वाले लोग गमलों में जीवन तलाशते हैं, लेकिन वो ये भूल जाते हैं कि कितने पेड़ों के बलिदान से ये भवन बना है।

दिल्ली जैसे महानगरों में तो प्रदूषण की इतनी विकराल समस्या है कि सर्दियों में तो सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। स्कूल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद करने पड़ जाते हैं और सम-विषम जैसे नियम लागू करने पड़ते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर ही पड़ता है, उनकी तो जिंदगी मानो रुक ही जाती है। यदि आज हमने पर्यावरण को बचाने का पूरे मनोयोग से काम नहीं किया तो इसके दुष्परिणामों की परिकल्पना करना भी असंभव सा होगा।

हम अपने आज को सुधार कर ही कल को नए आयाम दे सकते हैं। अगर कुछ अच्छा करना है तो कुछ अच्छा सोचना होगा और इसकी शुरुआत स्वयं से और छोटे बच्चों से ही की जा सकती है। बच्चों के मन मस्तिष्क में ये बात कूट-कूट कर डालनी है कि पृथ्वी हमारा घर है और इसको सहेजने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है। साँस ले और सांस लेने दें।

अंत में मेरी कुछ पंक्तियां...

हर सांस है, उधार की।

ये वृक्ष ही है, जीवन जो देता है।

कल के युग में, कल का संचय कर ।

खुली हवा में, सांस ले सकें

ऐसा यत्न तुम करो.....

आने वाली पीढ़ी को

जीवन तुम दे सको

ऐसा प्रयत्न तुम करो.....।

प्राचीन काल से ही पर्यावरण और विकास में घनिष्ठ संबंध रहा है। विकास के साथ ही पर्यावरण में प्रदूषण की समस्याएं जैसे- जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।अगर हमें इस समस्या से निजात पाना है तो इसमें वृक्षों का बड़ा महत्व हो जाता है। जितने ज्यादा पेड़ उतनी बड़ी राहत। पौधे वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर हमें प्राणवायु आक्सीजन प्रदान करते हैं।

हमें ऐसे पेड़- पौधे लगाने के लिए बच्चों को और स्वयं को भी प्रेरित करना चाहिए जैसे कि अशोक वृक्ष। अशोक का पेड़ न सिर्फ ऑक्सीजन उत्पादित करता है, बल्कि इसके फूल पर्यावरण को सुगंधित भी रखते है और उसकी सुंदरता भी बढ़ाते हैं। कुछ अन्य पेड़ जो पर्यावरण के लिए लाभदायक है।

पीपल: यह पेड़ सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देता है। कहते हैं भगवान बुद्ध ने इसी पेड़ के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था।

बरगद : इस पेड़ को भारत का राष्ट्रीय पेड़ भी कहते हैं। इसे हिंदू धर्म में बहुत पवित्र भी माना जाता है।

नीम : यह पेड़ नेचुरल एयर प्यूरीफायर है।

इसकी पत्तियों की संरचना ऐसी होती है कि बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन उत्पादित कर सकता है। इससे आस-पास की हवा हमेशा शुद्ध रहती है।

अर्जुन : इस पेड़ के काफी आयुर्वेदिक फायदे हैं। इसका धार्मिक महत्व भी है, कहते हैं माता सीता का यह पसंदीदा पेड़ था।

जामुन : इस पेड़ का भी औषधीय गुणों के कारण बहुत ज्यादा महत्व है।

प्राचार्य 22 अक्टूबर 2021 को फेसबुक पर लाइव

द ग्रेट इंडिया स्कूल, मंदिर हसौद, रायपुर के प्राचार्य राजेश कुमार अग्रवाल 22 अक्टूबर को दोपहर एक बजे नईदुनिया गुरुकुल फेसबुक पेज पर लाइव होगा। वह नईदुनिया गुरुकुल पर प्रकाशित “बहुत बड़ा काम” कहानी पर अनुभव साझा करेंगे।

- राजेश कुमार अग्रवाल, प्राचार्य, द ग्रेट इंडिया स्कूल, मंदिर हसौद, रायपुर

Posted By: Shashank.bajpai