रायपुर में पांच दिन पहले छोटे भाई मानस ने ली दीक्षा, अब बहन भूमि वैराग्य की ओर

Updated: | Tue, 07 Dec 2021 08:02 AM (IST)

श्रवण शर्मा, रायपुर। माता-पिता ने बचपन से ही पूजा पाठ, सामायिक, पंच प्रतिक्रमण, सप्त स्मरण, अक्षय निधि तप, अठाई उपवास करने के लिए प्रेरित किया। परिवार में शुरू से ही अध्यात्म का माहौल था। साल 2010 में कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका साध्वी निपुणा श्रीजी की शिष्या साध्वी राजेश श्रीजी का कोंडागांव आगमन हुआ था। उनके प्रवचन से मेरे मन में भक्ति भाव का ऐसा संचार हुआ कि मैंने सांसारिक जीवन त्यागकर तपस्या, संयम और मोक्ष मार्ग को अपनाने का फैसला किया। पहले तो माता-पिता को यकीन नहीं हुआ, फिर मेरी इच्छा शक्ति को देखते हुए उन्होंने अनुमति दे दी। यह कहना है कोंडागांव निवासी बीकाम सेकंड ईयर तक शिक्षा प्राप्त 20 वर्षीय मुमुक्षु भूमि गोलछा का। नईदुनिया ने मुमुक्षुओं से उनके वैराग्य जीवन में प्रवेश करने के उद्देश्यों पर बातचीत की।

10 सदस्य ले चुके हैं दीक्षा

मुमुक्षु भूमि ने बताया कि उनके पिता महेंद्र कुमार एवं मां संगीता गोलछा ने धार्मिक संस्कारों के बीज मेरे मन में रोपित किए। पांच दिन पहले ही मेरे छोटे भाई 17 साल के मानस गोलछा ने राजस्थान के मालपुरा तीर्थ में दीक्षा ली है। मुझे अब गुरुवर्या राजेश श्रीजी के सान्निाध्य में आठ दिसंबर को यह सुनहरा मौका मिल रहा है। तप, मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होने के लिए मैं बेताब हूं। यह मेरे जीवन का अनमोल पल है। इससे पहले मेरे खानदान में 10 लोग दीक्षा ले चुके हैं। भाई के बाद मैं 11वीं सदस्य हूं, जिसे दीक्षा का सुनहरा अवसर मिलने जा रहा है। मेरा युवाओं को यही संदेश है कि मोक्ष मार्ग में ही जीवन का शाश्वत सुख है।

मुझे समझ में आया कि जीवन का उद्देश्य मोक्ष मार्ग

बालोद के समीप छोटे से गांव कमरौद निवासी 12वीं में पढ़ रही 17 वर्षीय लब्धि संकलेचा ने बताया कि उनके पिता घनश्याम संकलेचा एवं ज्योतिदेवी संकलेचा ने घर में ही धार्मिक संस्कारों की शिक्षा दी। पूरे गांव में जैन समाज का एकमात्र हमारा घर है। गांव में कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका साध्वी निपुणा श्रीजी की शिष्या साध्वी स्नेहयशा श्रीजी जब पधारीं, तब हम उनके दर्शन करने गए। मेरे माता-पिता पर शुरू से ही उनका आशीर्वाद रहा है। उनसे वैराग्य जीवन अपनाने की प्रेरणा मिली। उनके प्रवचन सुनकर मुझे समझ में आया कि जीवन का असली उद्देश्य मोक्ष मार्ग की ओर ही अग्रसर होना है। माता-पिता ने पहले तो मुझे मना कर दिया, फिर भक्तिभाव में मेरी रुचि देखकर गुरुवर्याश्री पर छोड़ दिया। माता-पिता ने मेरे बड़े भाई कुमार पाल और छोटी बहन राखी गुंजन को भी अच्छे संस्कार दिए हैं। मेरा युवक-युवतियों से यही कहना है कि जीवन का असली उद्देश्य मोक्ष मार्ग ही है।

दादी को 14 साल से था इंतजार, अब पूरी होगी इच्छा

राजनांदगांव निवासी दो पोतों की दादी और दो नाती की नानी दुर्गा बाई के मन में 2007 में वैराग्य भाव जागा। भद्रावती तीर्थ दर्शन करने वे गईं थीं, जहां उपवास रखा था। उसी दौरान मोह माया से मन उचट गया। उन्होंने फैसला किया कि वे दीक्षा लेंगी। उनके दो बेटों और दो बेटियों ने अनुमति नहीं दी और कहा कि कुछ साल रुक जाओ। बेटी-बेटी के कहने पर मैंने इंतजार किया, लेकिन सांसारिक जीवन में मन नहीं लग रहा था। आखिरकार पिछले सप्ताह मैंने अपनी अंतिम इच्छा परिवार के समक्ष जताई। ले-देकर दोनों बेटे और दोनों बेटियों ने अनुमति दे दी। आखिरकार अब सही मार्ग पर जाने का अवसर मिल रहा है। मुझसे पहले 1993 में मेरी भांजी आनंद कंवर ने इंदौर में दीक्षा ली थी। मेरा यही संदेश है कि मेरे पोते-पोती, नाती भी धर्म के मार्ग की ओर अग्रसर हों।

Posted By: Shashank.bajpai