Gadkaleva In Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में नए सिरे से 14 जिलों में एक एकड़ क्षेत्र में बनेगा गढ़कलेवा

Updated: | Sun, 01 Aug 2021 07:20 AM (IST)

वाकेश कुमार साहू

रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। Gadkaleva In Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के व्यंजन की खुशबू को फैलने के लिए 28 जिलों में कलेक्टोरेट परिसर में गढ़कलेवा की शुरूआत की है। अब इसका विस्तार किया जा रहा है। गढ़कलेवा में अब आप व्यंजन का स्वाद तो लेंगे ही साथ ही छत्तीसगढ़ की संस्कृति की झलक देखने को भी मिलेंगी। जहां आदिवासियों की जीवन शैली को उकेरा जाएगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग ने प्रदेश के 28 जिलों के कलेक्टर को पत्र लिखाकर एक एकड़ जमीन मांग की है।

बताया जाता है कि यह जमीन जिले मुख्यालय के बजाय पर्यटन स्थल यानि लोगों की आवाजाही ज्यादा रहती है उस जगह पर मांग की गई है। फिलहाल अभी 14 जिलों के कलेक्टरों ने एक एकड़ जमीन गढ़कलेवा के नाम पर देने के लिए राजी हो गए है। इसके लिए विभाग ने ड्राइंग डिजाइन तैयार किया जा रहा है। जहां जल्द ही इसका निर्माण कार्य किया जाएगा। साथ ही इन जिलों के लिए संस्कृति विभाग ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में आबंटित राशि 104.40 लाख का बजट तैयार किया है।

15 अगस्त 2020 को सभी जिला मुख्यालयों में शुरू गढ़कलेवा

03 जून 2021 को संस्कृति विभाग ने एक एकड़ जमीन के लिए सभी कलेक्टर को पत्र प्रेषित किया

104.40 लाख का बजट तैयार

16 जिलों से नए सिरे से शुरूआत

307 सदस्यों को हर साल रोजगार मिल रहा है

15.07 लाख प्रति माह संस्कृति विभाग को आय

इन जिलों से प्रथम चरण में शुरुआत

नारायणपुर, कोण्डागांव, गरियाबंद, धमतरी, बलौदाबाजार, सूरजपुर, सरगुजा, जशपुर, महासमुंद, बालोद, रायगढ़, कोरबा, मुंगेली समेत मैनपाट इलाके में गढ़कलेवा स्थापित किया जाएगा।

आदिवासी संस्कृति की छाप

गढ़कलेवा को नए सिरे से सजाने के लिए एक एकड़ परिसर में गार्डन, आदिवासियों की रहन-सहन यानि उनके घर जैसे हाल, लकड़ी की कुर्सियां आदि लगाई जाएगी। कुल मिलाकर एक देशी रेस्टोरेंट की तरह हमारा गढ़कलेवा नजर आएगी।

इस तरह के व्यंजन का उठा सकते है लुत्फ

नमकीन व्यंजन- चीला, फरा, बफौरी, चौसेला, धुसका, उड़द बड़ा, मुंग बड़ा, माड़ापीड़ा, भजिया, पान रोटी, आलू गुंडा, साबुदाना, ठेठरी, मुरकू, मुठिया। मीठा पकवान- गुलगुला, बबरा, पिड़िया, ऐरसा, खाजा, पुरन लड्डू, खुरमी, देहरौरी, करी लड्डू, पपची, दू्ध फरा, महुआ लड्डू। शीतल पेय- दही, छाछ नमकीन, छाछ मीठा, नींबू पानी नमकीन, आम पना मीठा (सीजन), आम पना नमकीन, बेल शरबत (सीजन), सत्तु शरबत (सीजन)। गर्म पेय- काला चाय, दूध चाय, गुड़ चाय (काला), गुड़ चाय (दूध वाला), नींबू चाय (काला), कांके पानी (सीजन)। इसके अलावा बस्तर के मडिया पेय आदि का लुत्फ उठा सकते है।

संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ के संचालक विवेक आचार्य ने कहा कि प्रथम चरण में 14 जिलों में एक एकड़ जमीन पर गढ़कलेवा विकसित करने का प्लान तैयार कर लिया है। जल्द ही इन जगहों पर काम शुरू कर दिया जाएगा। यहां पूरी तरह के छत्तीसगढ़ के व्यंजन को ही परोसा जाएगा।

Posted By: Kadir Khan