एचआइवी मरीज भी जीते हैं सामान्य जिंदगी, संकोच छोड़ शासकीय अस्पतालों में इलाज कराएं

Updated: | Wed, 01 Dec 2021 07:12 PM (IST)

रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। एचआइवी (एक्वायर्ड इम्युनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम) को जड़ से खत्म करने का कोई इलाज नहीं है। लेकिन दवाओं के माध्यम से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। सरकार द्वारा इस बीमारी के लिए आजीवन निश्शुल्क जांच, उपचार व दवाओं की सुविधा दी जाती है। विश्व एड्स दिवस पर बुधवार को नईदुनिया के हेलो डाक्टर कार्यक्रम में अतिथि के रूप में मौजूद डा. भीमराव आंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर व एचआइवी विशेषज्ञ डा. आरएल खरे ने यह बात कहीं।

डा. खरे ने बताया कि आमतौर पर देखा जाता है कि एचआइवी संक्रमण की जानकारी होते ही मरीज मानसिक अवसाद में चला जाता है। वहीं लोकलाज का डर से चिकित्सकीय उपचार कराने भी नहीं पहुंचते। ऐसे मरीज संकोच छोड़ शासकीय अस्पतालों में इलाज कराएं और जागरूकता से अपने जीवन को आसान बना सकते हैं। डा. खरे ने बताया कि आंबेडकर अस्पताल में एचआइवी मरीजों के लिए तृतीय तल में विशेष ओपीडी संचालित की जाती है। इसमें हर दिन करीब 150 से 200 एचआइवी मरीजों का निश्शुल्क उपचार हो रहा है। इनकी जानकारी जहां गुप्त रखी जाती है। एचआइवी से संबंधित सभी इलाज निश्शुल्क है। देखा जा रहा है कि एचआइवी को लेकर समाज में आज भी जागरूकता का अभाव है। ऐसे में लोगों को जागरूक करने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं।

पाठकों के सवाल पर चिकित्सक के जवाब

(नोट : सवाल पूछने वाले मरीजों व पाठकों की निजता को ध्यान में रखते हुए नाम प्रकाशित नहीं किया जा रहा है।)

- किस तरह से एचआइवी पाजिटिव हो सकते हैं?

- एचआइवी संक्रमित से असुरक्षित यौन संंबंध, संक्रमित सीरिंज व सुई का दूसरी बार उपयोग, संक्रमित मां से बच्चों को, संक्रमित रक्त आदि से एचआइवी पाजिटिव हो सकते हैं।

- एचआइवी के लक्षण किस तरह के होते हैं?

- तेज और लंबे समय तक बुखार, वजन में तेजी से घटना, पतला दस्त माहभर से खत्म न होना, कमजोरी, भूख न लगना, छाती आदि में इंफेक्शन जैसी समस्याएं हो तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है। इस तरह के लक्षण में एचआइवी या अन्य बीमारियों जरूर होती है।

पाजिटिव आने पर क्या करें? क्या इलाज कही भी हो सकता है?

- एचआइवी पाजिटिव आने की स्थिति में मानसिक आघात हर मरीज को होता है। ऐसे में घबराने की आवश्यकता नहीं है। बेहतर इलाज व अच्छी दवाइएं शासन स्तर पर निश्शुल्क उपलब्ध कराई जा रही। किसी भी शासकीय अस्पताल, मेडिकल कालेज, एआरटी या आइसीटीसी सेंटरमें जाएं निश्शुल्क इलाज की सुविधाएं हैं।

- एड्स कितने चरण में होते हैं?

- इसके चार चरण होते हैं। सबसे पहले संक्रमण की स्थिति को एचआइवी यानी एक्वायर्ड इम्युनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम कहा जाता है। जैसे-जैसे स्थिति खराब होती है। मरीज क्रमश: चरणों में प्रवेश करता है। गंभीर अवस्था को एड्स कहा जाता है। संक्रमण के आधार पर दवाएं व इलाज मौजूद है। जिससे सामान्य जीवन जी सकते हैं।

- क्या इस बीमारी को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है?

- एचआइवी को पूरी तरह खत्म तो अभी नहीं किया जा सकता। लेकिन जीवन सामान्य चले इसके लिए विश्वस्तरीय बेहतर दवाएं निश्शुल्क शासन उपलब्ध करा रही है। जिससे बीमारी को निम्स स्तर पर लाया जा सकता है। एचआइवी को खत्म करने को लेकर वैश्विक स्तर पर शोध चल रहे हैं।

- क्या किसी को छूने से भी एचआइवी फैल सकता है?

- यह बीमारी छूने से नहीं फैलती। संक्रमित व्यक्ति से असुरक्षित यौन संबंध बनाने या अन्य कारण है।

- बच्चों में एचआइवी कैसे फैलता है? क्या इनके लिए बेहतर इलाज उपलब्ध है?

- एचआइवी पीड़ित कुल नए मरीजों में चार फीसद बच्चे होते हैं। जन्म के दौरान संक्रमित मां से बच्चों में यह आता है। इस स्थिति में बच्चों इलाज तुरंत शुरू किया जाता है। दवाओं से स्थिति सामान्य रहती है।

- संक्रमित व्यक्ति के फैमिली प्लानिंग में क्या समस्याएं आती है?

- बीमारी से पीड़ित होने पर के बीच यदि दंपती फैमिली प्लानिंग के लिए सोचते हैं। पहले तो दवाएं से संक्रमण के स्तर को कंट्रोल किया जाता है। रिस्क को कम कर के बच्चे का प्लान किया जाता है। ऐसी स्थिति में एचआइवी विशेषज्ञ की सलाह अहम है।

- क्या, थूक, आंसू या पेशाब से भी एचआइवी फैल सकता है?

- यह संक्रमण खून, स्पम, पेट का पानी आदि से फैलता है। थूक, आंसू या पेशाब में संक्रमण का रिस्क नहीं होता है। यदि इसमें रक्त का संपर्क हो ही आशंका प्रबंल होती है।

- बीमारी से मौत का खतरा कितना है?

- एचआइवी होने पर मौत का खतरा तभी है, जब आप इलाज नहीं कराते और गंभीर अवस्था में पहुंच चुके हैं। इसलिए पाजिटिव आने पर दवाएं नियमित रहे तो सामान्य जीवन ही होता है।

- एचआइवी व एड्स में अंतर क्या है। और यह किस तरह से शरीर को नुकसान पहुंचाता है?

- पाजिटिव होने का पहला चरण एचआइवी है। इसमें संक्रमण का स्तर बेहद कम होता है। गंभीर अवस्था में पहुंचा एड्स कहलाता है। संक्रमण पहले शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुंचाकर उसे कमजोर करता है। इसलिए दवाओं से संक्रमण को सबसे निम्न स्तर पर लाया जाता है। ताकि व्यक्ति सामान्य जीवन जी सके। मरीजों को दवाएं नियमित लेनी है। इसका ध्यान रखना चाहिए।

Posted By: Ravindra Thengdi