Chaturmas 2021: दान-ज्ञान न सही, विनयवान जरूर बनें: साध्वी हंसकीर्तिश्रीजी

Updated: | Fri, 06 Aug 2021 07:43 AM (IST)

रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में साध्वी हंसकीर्तिश्रीजी ने कहा, लोग कहते हैं कि इतनी संपत्ति नहीं जिसे दान कर दें। यदपि वे दान करना चाहते हैं। हम कहते हैं कि आप में अभी ये योग्यता नहीं कि आप ज्ञानी बन जाएं। ऐसे में सवाल उठता है कि जीव अपनी आत्मा का कल्याण कैसे करे। उन्होंने कहा कि इसका सरल सा उत्तर हमारे ज्ञानी भगवंतों ने दिया है।

यदि आपके जीवन में ज्ञान-दान का संयोग नहीं है, तो आप कम से कम विनयवान तो बन ही सकते हैं। विनयवान बनने के लिए आपको अपने अहम को जलाना होगा। तभी शुद्ध आत्मा से परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है। साध्वीश्री ने बताया कि समकित के 67 बोल में हमने अब तक चार श्रद्धा, तीन लिंग को भलीभांति समझा है।

अब हम विनय के 10 प्रकारों को समझेंगे जो अरिहंत, सिद्ध, चैत्य, सूत्र, क्षमा, आचार्य, उपाध्याय, चतुर्विद संघ, सम्यक दर्शन आदि हैं। किसी इमारत में नींव न हो तो वह ज्यादा वक्त तक टिक नहीं सकती, उसी प्रकार जीवन में विनय रूपी नीव न हो तो आत्मा को धराशायी होने से कोई नहीं बचा सकता। विनय रूपी नींव मजबूत होगी तो आत्मा भी मजबूत होगी।

जीवन में विनय को स्थान नहीं दिया तो अनादिकाल से भव भ्रमण कर रही आत्मा अनंतकाल तक जन्म-मरण के बंधन से मुक्त नहीं हो पाएगी। दान का महत्व बताते हुए साध्वीश्री ने कहा कि दान बीज के समान है जिसे बोएंगे तो निश्चित ही भविष्य में मीठे फल भी मिलेंगे।

Posted By: Shashank.bajpai