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Nagar Ghade Column: अस्थियों में आस्‍था

Updated: | Fri, 25 Jun 2021 08:45 AM (IST)

रायपुर। Nagar Ghade Column: अपने बुजुर्गों, पूर्वजों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित कर मोक्ष दिलाने के कर्तव्य का निर्वहन तो ज्यादातर लोग करते ही हैं, लेकिन 200 से अधिक अज्ञात लोगों की अस्थियों को पूरे विधि-विधान के साथ महादेव घाट में विसर्जित कर शहर के एक युवा ने तो मिसाल ही पेश कर दी है। कोरोना महामारी के भीषण दौर में जब अपनों ने ही अपनों से मुंह मोड़ लिया और उनके दुनिया छोड़ने के बाद अस्थियों को नदी में विसर्जित करना भी जरूरी नहीं समझा।

ऐसे में किसी गैर द्वारा अपनों का फर्ज निभाने का यह उदाहरण युवाओं को प्रेरित करने और इंसानियत के जिंदा होने को प्रमाणित करने वाला है। कार, बंगला, जमीन-जायदाद सब कुछ यहीं रह जाएगा। यदि कुछ साथ जाएगा तो केवल पुण्य कर्म। युवा के इस कार्य की शहर में खूब प्रशंसा हो रही है। निश्चित ही मृतकों की आत्मा उसे दुआ दे रही होगी।

सब कुछ खुले पर धार्मिक स्‍थल नहीं

ढाई महीने पहले लगे लाकडाउन के बाद अब हर शहर के बाजार खुल गए। दफ्तर, मदिरालय, शापिंग माल, छोटी-बड़ी सभी दुकानें खुल गईं, किंतु जिन पर संपूर्ण सृष्टि के लोगों की आस्था है, वे भगवान, प्रभु अब तक धर्मस्थलों में ही कैद हैं। आम जनता उनके दर्शन नहीं कर सकती। पूजा, इबादत, अरदास के लिए जाने पर पाबंदी नहीं हटाई गई है। पुजारी, मौलवी समेत अन्य धर्मों के सेवादारों ने अब प्रशासन से कहना ही छोड़ दिया है। सोच लिया है कि जब सरकार की मर्जी हो, तब धर्मस्थलों को खोले। ये सेवादार भले ही चुप बैठ गए हैं, लेकिन धर्मस्थलों को खुलवाने के लिए अब जनप्रतिनिधि आगे आ गए हैं। इनका तर्क है कि जब मदिरालय और बाजारों की भीड़ से संक्रमण का खतरा नहीं लग रहा है तो धर्मस्थलों को बंद रखना एक तरह से आस्था के साथ खिलवाड़ करना ही है।

आक्‍सीजन वाले पेड़ लगाने की मुहिम लाई रंग

पीपल, बरगद, नीम जैसे पेड़ों को लगाने के लिए हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा ही प्रेरित करते रहे हैं। लेकिन जब से कोरोना आया और आक्सीजन की कमी का लोगों ने सामना किया, तब से यह जानकर कि ये पेड़ आक्सीजन के बेहतर स्रोत हैं, लोग अपने आवास परिसर, तालाबों के किनारे, उद्यानों व खाली स्थानों पर इन्हें रोपने के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। कुछ समाज ने तो ऐसा भी निर्णय ले लिया है कि पूर्वजों के नाम पर पौधे रोपें। उनकी देखरेख करें। इससे पूर्वजों का सम्मान भी होगा और पर्यावरण को बचाए रखने का उद्देश्य भी पूरा होगा। विभिन्न समाजों की इस पहल से भविष्य में लोगों को स्वच्छ हवा के साथ-साथ हरियाली भी देखने को मिलेगी। इस पर लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी ने हमें प्रकृति के महत्व को बताते हुए साथ में रहना सिखा दिया है।

योग का जाना महत्व बना रिकार्ड़

देश के एक बड़े योगी वर्षों से लोगों को योग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, लेकिन बहुत ज्यादा लोग इससे जागरूक नहीं हुए थे। लेकिन जब से कोरोना आया, दहशतजदा लोग योग की शरण में चले गए। अब तो स्थिति यह हो गई है कि हर घर में छोटे-बड़े सभी सदस्यों ने योग को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है। योग दिवस पर जागरूक करने के लिए राज्य सरकार ने वर्चुअल योग का आयोजन भी किया था।

इसमें प्रदेशभर से 10 लाख से अधिक जुड़े और घर पर योग करके प्रशासन के पोर्टल में फोटो भेजी। ऐसी जागरूकता इससे पहले कभी नहीं देखी गई। इसने सरकार को गोल्डन बुक आफ रिकार्ड का प्रमाणपत्र भी दिलाया। शहर के योगी, प्रशिक्षक और सरकार खुश हैं कि देर से ही सही, लोगों ने सनातनकाल से चली आ रही विद्या के महत्व को तो जाना।

Posted By: Azmat Ali
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