Naidunia Column Of The Record: छत्तीसगढ़ में खुला गैर सरकारी संगठनों NGO का खेल

Updated: | Mon, 02 Aug 2021 04:21 PM (IST)

रायपुर। Naidunia Column Of The Record: स्कूली शिक्षा में गुणवत्ता की आड़ पर वर्षों से चल रहे कुछ गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) की कारगुजारियों की पोल खुली है। चर्चा है कि कुछ एनजीओ पिछले 15 साल से ऐसे पाठ्यक्रम पर छत्तीसगढ़ में काम कर रहे थे जो प्रदेश के बच्चों के लिए लागू ही नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ एनजीओ तो वर्तमान में शिक्षा विभाग में पदस्थ कुछ अफसरों से ही तालुकात रखते हैं और पर्दे के पीछे से उनके लिए काम करते हैं । स्कूली बच्चों को पढ़ाने का मामला हो या शिक्षकों प्रशिक्षित का। और तो और यहां लेखन के काम में भी राज्य के सवा दो लाख शिक्षकों पर गैर सरकारी संगठन के विद्वान हावी हैं। इसके बाद भी सरकारी संस्थानों में एनजीओ का खूब बोलबाला है। बहुत सारे संस्थान अलग-अलग जिलों में अपना प्रयोग कर रहे हैं और बच्चों को प्रयोगशाला बना दिया गया।

अफसर ने पकड़ी मनमानी

अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था यूनिसेफ की ओर से निर्मित सीजी एजुकेशनल वेबसाइट इन दिनों विवाद में है। इस वेबसाइट पर वीडियो के जरिए यूनिसेफ के अधिकारियों ने एक वीडियो संदेश जारी कराया था। इस संदेश में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यूनिसेफ के शैक्षणिक कार्यक्रम की तारीफ की थी। बाद में पता चला कि यूनिसेफ के कुछ अधिकारियों ने इस वीडियो में राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के नाम का भी जबरन उल्लेख किया था। जबकि इस मामले में प्राधिकरण के किसी भी अधिकारी ने अपनी सहमति नहीं दी थी। प्राधिकरण के आइएएस अफसर इस मामले को पकड़ लिए और यूनिसेफ के एक बड़े अधिकारी को कारण बताओ नोटिस थमा दिया। कहने का मतलब यह है कि शिक्षा की आड़ पर कुछ संस्थान मनमानी कर रहे हैं। यह छोटा सा उदाहरण है। इसके पहले भी कई खेल इसी तरह हुए हैं जो जांच की आंच से बाहर हैं।

स्कूल के बहाने से राजनीतिक एजेंडा

सरकारी स्कूल खुले या न खुलें पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के लिए यह राजनीतिक एजेंडा जरूर बन गया है। कुछ पार्षद स्कूल खोले या नहीं खोलें इस पर निर्णय लेने के लिए गंभीरता से नहीं , बल्कि राजनीतिक विचारों के माध्यम से निर्णय ले रहे हैं। कुछ विरोध की मुद्रा में दिख रहे हैं तो कुछ अपनी ताकत दिखाने के लिए काम कर रहे हैं। जानकारी मिली है कि कुछ पार्षदों ने शिक्षकों पर ही दबाव बना दिया है कि आप स्कूल नहीं खोलने के लिए खुद ही लिखकर दें। ऐसे में इन स्कूलों के शिक्षक मजधार में फंस गए हैं। एक तरफ प्रशासन और दूसरी तरफ जनप्रतिनिधियों की हुकूमत। दोनों के बीच में फंसकर शिक्षक कुछ भी निर्णय नहीं ले रहे हैं। कुछ इलाकों में सरकार के निर्णय को सही ठहराने के लिए राजनीतिक रूप से भी स्कूल खाेलने की अनुमति देने की चर्चा जोरों पर है ।

अफसर ने क्या बिगाड़ा था?

रायपुर में कुछ राशन दुकानदारों का गिराेह चल रहा है। इन दुकानों पर यदि कोई खाद्य अधिकारी कार्रवाई करता है तो उसे विधायक और मंत्रियों के बंगले से फोन आ जाते हैं। नियमों को देखकर यदि कोई अफसर इन दुकानों की जांच करने का दुस्साहस करता है तो उसे निलंबित कर दिया जाता है। हाल ही में कुछ राशन माफियाओं की चोरी पकड़ी गई तो दुकानों पर नहीं ,बल्कि दो खाद्य अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। एक महिला और एक पुरुष खाद्य अफसर के निलंबित होने के बाद दूसरे खाद्य अधिकारी भी खौफ में हैं। इनमें से एक अधिकारी के बारे में चर्चा है कि वह दोनों ही गुट में शामिल हैं। एक तरफ कुछ राशन दुकानदारों से भी सांठगांठ रखते हैं और दूसरी तरफ खाद्य अधिकारियों पर कार्रवाई करवाने में भी इनकी भूमिका है। यानी ये अपने दोनों हाथों लड्डू लिए हैं।

Posted By: Kadir Khan