Naidunia Weekly Column: कुर्सी का चक्कर, भूल गए विकास के मुद्दे

Updated: | Sun, 01 Aug 2021 03:15 PM (IST)

सतीश पांडेय

रायपुर। Naidunia Weekly Column: पीछे तरफ की कुर्सी देखकर पार्षदों ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए सभापति के डायस के सामने जमीन पर बैठकर धरना दे दिया। सवाल उठाया कि उनके बैठने की व्यवस्था आखिर कैसे बदल दी गई? दरअसल पूर्व की सामान्य सभा में जहां बंसल एवं साहू बैठे थे, वह स्थान इस बार नव नियुक्त एल्डरमेन अफरोज़ अंजुम, इंद्रजीत गहलोत के लिए रखा गया था। निर्दलीय पार्षदों को यह नागवार गुजरा और जनता के मुद्दे उठाने के बजाए घंटों हंगामा खड़ा किया। इससे समय पर शहर विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पाई। विपक्ष ने भी निर्वाचित पार्षदों का अपमान बर्दाश्त नहीं करने की चेतावनी दे दी।बाद में सभापति प्रमोद दुबे के आश्वस्त किए जाने पर पार्षद द्वव अपने स्थान पर बैठे।

यह कैसी जनसुनवाई

सूबे में 50 लाख से अधिक बिजली के उपभोक्ता हैं,लेकिन जागरूकता का ऐसा अभाव है कि नए टैरिफ के लिए बिजली नियामक आयोग में पिछले दिनों हुई जनसुनवाई में एकमात्र उपभोक्ता के रूप में मोहन एंटी ही पहुंचे थे।चौंकाने वाली बात यह रही कि न तो व्यापारी वर्ग न किसी संगठन के पदाधिकारी और न कोई कारोबारी पहुंचा।कृषि वर्ग से जरूर कुछ लोग पहुंचे और बिजली की कीमत न बढ़ाने की मांग रखी।दरअसल बिजली के नए टैरिफ के लिए एक बार फिर से जनसुनवाई हो रही है। हालांकि यह सुनवाई वर्चुअल रखी गई थी,इसमें आनलाइन कोई भी नहीं जुड़ा, लेकिन आयोग के दफ्तर में जरूर कुछ लोग सुझाव देने पहुंच गए थे।पहले दिन तीन वर्गों के लिए सुनवाई रखी गई थी।इसमें सबसे कम घरेलू वर्ग शामिल था।प्रदेश में सबसे ज्यादा घरेलू वर्ग के ही उपभोक्ता हैं, लेकिन इस जनसुनवाई से साफ होता है कि बिजली के टैरिफ से घरेलू वर्ग को कोई लेना-देना नहीं है।

बच्चों को स्कूल भेजने तैयार नहीं अभिभावक

कोरोना संकट काल के बीच सरकार दो अगस्त से स्कूल खोलने जा रही लेकिन न तो बच्चे न उनके अभिभावक इसके लिए तैयार है।वहीं शिक्षक कोरोना टीके को लेकर आशंकित है। सभी का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर आने की बात हो रही है। ऐसे हालात में बच्चे कैसे स्कूल जा सकेंगे। अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं है। शिक्षकों का डर खत्म करने शिक्षा विभाग ने वैक्सीनेशन की व्यवस्था कर रखी है, लेकिन कई शिक्षक अभी टीका नहीं लगवा रहे हैं। ऐसे में बिना टीका लगाए वे स्कूल में बच्चों को पढ़ाने भी नहीं जाएगे। शिक्षा विभाग की स्पेशल टीम ने 11053 स्कूल स्टाफ पर सर्वे भी किया। तय फार्मेट में जानकारी मांगी कि उन्होंने टीके लगवाए या नहीं, यदि नहीं तो क्यों? करीब पौने चार हजार शिक्षकों में से एक हजार ने दिलचस्प जवाब देते हुए कहा,टीका लगाने पर अगर यदि हमें कुछ हो गया तो घर-स्वजनों को कौन संभालेंगा।

विभाग के राजदार को तगड़ा झटका

परिवहन विभाग में वर्षों से नन्हें नामक कर्मचारी का सिक्का चलता आ रहा था,लेकिन अब तगड़ा झटका मिला और रूतबा खत्म होने की राह पर है। दरअसल नन्हें की जगह विभाग में आए एक डीएसपी ने ले ली है।चर्चा है कि नन्हें के खिलाफ अफसर भी खुलकर सामने आ गए थे। यहीं कारण है कि उन्हें किनारे लगा दिया गया। नन्हें का काम काफी संवेदनशील होता था, इसलिए अफसर किसी और पर भरोसा नहीं करते थे। कई सरकार बदली लेकिन नन्हें का जलवा कायम रहा। कांग्रेस सरकार के ढाई साल के कार्यकाल के बाद ऐसा क्या हुआ कि डीएसपी ने वरिष्ठों का विश्वास हासिल करके नन्हें को किनारे लगा दिया। सबसे पहले आम्रपाली में उनके अघोषित दफ्तर को बंद कराकर नई जगह पर शिफ्ट करवा दिया। सारा काम छिन जाने से विभाग के राजदार नन्हें काफी दुखी और आहत हैं। अब जानकारों की निगाह अनुभवी नन्हें के अगले कदम पर टिकी हुई है।

Posted By: Kadir Khan