HamburgerMenuButton

Chhattisgarh: नक्सलियों का मनोविज्ञान बदल रहे मनोचिकित्सक एसपी

Updated: | Wed, 02 Dec 2020 10:16 AM (IST)

अनिल मिश्रा, जगदलपुर। Chhattisgarh: नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले के एसपी डा. अभिषेक पल्लव नक्सलियों का मन बदलने के लिए अपनी पढ़ाई का भरपूर उपयोग कर रहे हैं। नक्सलियों के बीच चलाए जा रहे लोन वर्राटू (घर वापसी) अभियान की वजह से दंतेवाड़ा की देशभर में चर्चा हो रही है। प्रदेश में नक्सलियों के लिए आत्मसमर्पण की नीति तो पहले से ही है पर डा. अभिषेक पल्लव के सफल क्रियान्वयन का ही परिणाम है कि बीते दो महीने में अकेले दंतेवाड़ा जिले में 200 से अधिक नक्सलियों ने हथियार डाल दिए हैं। इनमें कई पांच से आठ लाख तक के इनामी नक्सली हैं।

लोन वर्राटू अभियान की खासियत यह है कि फर्जी आत्मसमर्पण का आरोप कोई नहीं लगा पाया है। इसके लिए दंतेवाड़ा पुलिस ने पहले जिले के नक्सलियों की कुंडली तैयार की। उनका नाम, पद, परिवार की जानकारी, पता आदि ब्योरा मीडिया में जारी किया। इसके बाद जवान नक्सलियों के घरों तक पहुंचे। उनके स्वजनों को समझाया। इसमें मनोविज्ञान के सिद्धांतों का भरपूर उपयोग किया गया और नतीजे सुखद रहे। डा. पल्लव मनोचिकित्सा विज्ञान में एमडी हैं। दंतेवाड़ा में एसपी रहते हुए वह पहले भी सुर्खियों में आ चुके हैं। नक्सल विरोधी अभियान में वह दवाओं का थैला लेकर जाते हैं और बीमार आदिवासियों का उपचार करते हैं।

ऐसे बदलता है मन

वैसे तो डा. पल्लव मिलने वाले हर व्यक्ति के मनोभाव पढ़ लेते हैं, पर नक्सल मामले में उनकी पढ़ाई बहुत उपयोगी साबित हो रही है। वे कहते हैं कि जंगल में पले-बढ़े और नक्सलियों के बीच रहे युवाओं के मन के भाव नाजुक होते हैं। पुलिस के बीच आने के बाद पहले उन्हें खुद पर भरोसा नहीं होता। यह मानने को तैयार नहीं होते कि नक्सल संगठन छूट गया है। इसके बाद उनमें अपराध बोध की भावना आती है कि क्यों संगठन छोड़ा? तीसरे चरण में उनके मन में क्रोध की भावना आती है कि अब नक्सलियों से लड़ना है और चौथे चरण में अवसाद घेर लेता है कि अपने लोगों से ही लड़ना पड़ेगा। आखिरी चरण में यह स्वीकारोक्ति मन में आती है कि अब पुलिस के साथ ही काम करना है, यह जिंदगी बेहतर है।

यह कर रही है पुलिस

नक्सलियों का मन बदलने के लिए पुलिस मनोविज्ञानी तरीके अपना रही है। इसके तहत प्रोत्साहन, समझाना, पारिवारिक काउंसिलिंग व परामर्श, सुलह और पुनर्वास प्रमुख कार्य हैं।

नक्सलवाद से युवा किसी भी वजह से जुड़े हों, हमारा प्रयास है कि उन्हें मुख्यधारा में लाया जाए इसलिए आत्मसमर्पण की नीति तय की गई है। बस्तर में शांति लाने के लिए आपरेशन के साथ दूसरे उपाय भी अपनाए जा रहे हैं। दंतेवाड़ा एसपी ने इस मामले मेें बेहतर किया है। उनकी योजना को दूसरे जगहों पर भी लागू करेंगे।

- डीएम अवस्थी, डीजीपी, छत्तीसगढ़

Posted By: kunal.mishra
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.