नारी शक्ति के रूप में पूजी जाती है रानी सती दादी, 46 साल से प्रज्वलित हो रही अखंड जोत

Updated: | Sat, 27 Nov 2021 11:09 AM (IST)

रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हर साल अगहन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर रानी सती दादी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इसे मंगसीर नवमी कहा जाता है। इस साल जन्मोत्सव 27 और 28 नवंबर को मनाया जाएगा। दो दिवसीय उत्सव का शुभारंभ शनिवार की शाम जोत प्रज्वलित करने के साथ होगा। मंदिर का निर्माण 1975 में पूरा हुआ था, राजस्थान के झुंझुनूं स्थित मुख्य मंदिर की महाजोत से ज्योति लाकर प्रतिष्ठापित की गई थी, तब से 46 साल से लगातार अखंड जोत प्रज्ज्वलित हो रही है। रायपुर के राजा तालाब स्थित मंदिर में रानी सती दादी का कोई आकार नहीं है बल्कि त्रिशूल रूप की पूजा की जाती है। रानी सती को नारी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। नारी शक्ति का प्रतीक मानते हुए ही पूजा करते हैं, ताकि नारियों में आत्म सम्मान, सतीत्व की भावना जागृत हो।

मंदिर समिति के अध्यक्ष किशोर ड्रोलिया ने बताया कि हर साल अगहन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को श्री रानी सती दादी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इसे मंगसिर नवमी भी कहा जाता है। मंदिर समिति के कैलाश अग्रवाल ने बताया कि पहले दिन 27 नवंबर को रात्रि 7.30 बजे जोत प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत होगी। रात 8 बजे से भजन गायकों द्वारा भजन संकीर्तन एवं रात्रि 11 बजे आरती तथा छप्पन भोग का प्रसाद वितरित किया जाएगा। दूसरे दिन 28 नवंबर को सुबह 7:30 बजे जात-धोक पूजा और दोपहर 2 बजे से दादीजी का मंगल पाठ होगा। शाम 6.30 बजे महाआरती के साथ समापन होगा।

राजस्थान के झुंझनू की तर्ज पर बना है सती दादी मंदिर

राजा तालाब में नारी शक्ति का प्रतीक 'राणी सती दादी' मंदिर छत्तीसगढ़ में प्रसिद्ध है। राजस्थान के झुंझनू में बने विशाल मंदिर की तर्ज पर 1975 में छोटा सा मंदिर बनाया गया था। पहले कुछ ही परिवार के लोग दर्शन करने आते थे लेकिन अब मंदिर की ख्याति प्रदेशभर में फैल चुकी है और हर अमावस्या को दर्शन करने के लिए मंदिर में

श्रद्घालुओं का लगा रहता है तांता

राजस्थान के कई समाज की इष्टदेवी के रूप में राणी सती दादी की पूजा की जाती है। भक्तों में ऐसी मान्यता है कि राणी सती माता देवी दुर्गा का अवतार हैं। इस मान्यता के चलते माता के प्रतिरूप को त्रिशूल स्वरूप में प्रतिष्ठापित किया गया है। माता का मंदिर स्त्री सम्मान, ममता और स्त्री शक्ति का प्रतीक है।

अन्य देव-देवियों की प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित

मंदिर में शक्ति स्वरूपा राणी सती दादी के स्वरूप के अलावा भोलेनाथ, मां पार्वती, राधा-कृष्ण, सीताराम, हनुमान आदि देवगणों की प्रतिमाएं भी प्रतिष्ठापित की गई हैं।

भाद्रपद और अगहन में विशेष पूजा

मंदिर प्रतिदिन सुबह 5 बजे खुलता है, आरती, पूजन, प्रसाद वितरण के बाद 12 बजे पट बंद होता है। इसके बाग शाम 4 बजे पुन: पट खुलते हैं, रात 7 बजे महाआरती, प्रसाद वितरण किया जाता है। 9 बजे मंदिर बंद हो जाता है। साल में दो बार मंदिर में भव्य उत्सव मनाया जाता है, पहला भादो अमावस्या और दूसरा मिंगसर (अगहन) नवमी को प्राकट्य महोत्सव मनाते हैं। इस दौरान मंदिर में रातभर भजन-कीर्तन, 56 भोग, जात धोक पूजा होती है और प्रदेशभर से श्रद्घालु आते हैं।

Posted By: Ravindra Thengdi