Railway News: सारनाथ एक्सप्रेस के पांच स्लीपर कोच को हटाकर जोड़ रहे एसी बोगी, यात्रियों की जेबें होंगी ढीली

Updated: | Mon, 25 Oct 2021 08:33 AM (IST)

Railway News: रायपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना संकटकाल के बाद से रेलवे नियमित ट्रेनों को स्पेशल बना यात्रियों से अधिक किराया वसूलकर चला रही है।सारनाथ एक्सप्रेस की पांच स्लीपर कोच को हटाकर एसी बोगी जोड़ने और थर्ड एसी में आठ बर्थ कम करने के रेलवे के फैसले पर आम यात्री जहां उगंली उठा रहे है, वहीं रेलवे अफसरों का तर्क है कि आने वाले दिनों में ट्रेनों की रफ्तार 130 करने की तैयारी है।

स्लीपर कोच खुले होने से हवा घुसने की वजह से रफ्तार कम होती है। वहीं ज्यादातर यात्रियों की पसंद एसी थ्री थी इसलिए पांच स्लीपर कोच को कम करके एसी बोगी जोड़ी जा रही है। कोरोना संकट के चलते रेलवे पिछले करीब एक साल से आम यात्रियों की जेबें काटकर अपनी कमाई बढ़ाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहा है।

कोरोना में भी रेलवे प्रबंधन ने निकाला कमाई का जरिया

अफसरों का तर्क ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने स्लीपर हटाना जरूरी

इसी क्रम में दुर्ग-छपरा सारनाथ एक्सप्रेस के पांच स्लीपर कोच की कटौती करने जा रही है। इससे आम यात्रियों को मिलने वाले चार सौ बर्थ का कोटा स्वत: समाप्त हो जाएगा। स्लीपर में बर्थ फुल होने के बाद यात्रियों को मजबूरी में अधिक किराया देकर थर्ड एसी की टिकट लेकर यात्रा करने को विवश होना पड़ेगा।

कोरोना संकटकाल से ही रूटीन की ट्रेनों को स्पेशल के नाम पर रेलवे चला रहा है और यात्रियों पर किराए का बोझ दोगुना से भी ज्यादा डालकर कमाई कर रहा है। दुर्ग-छपरा सारनाथ एक्सप्रेस के पांच स्लीपर कोच की कटौती कर एसी बोगी जोड़ने की तैयारी 27 नवंबर से की गई है।

त्योहारी सीजन में दुर्ग-छपरा सारनाथ स्पेशल के स्लीपर कोच में कटौती होने से यात्रियों की जेबे ढीली होगी।रेलवे मंडल से मिली जानकारी के मुताबिक दोनों ही रूट की ट्रेनों में अभी 11 स्लीपर क्लास डिब्बे हैं,इसमें से पांच स्लीपर कोच हटाने के बाद शेष छह स्लीपर कोच रह जाएंगे।

इसके बदले थर्ड एसी के डिब्बे जोड़े जाएंगे। अब ट्रेन में छह थर्ड एसी, दो सेकेंड एसी और एक फ़र्स्ट सह सेकेंड एसी के कोच रहेंगे। वर्तमान में तीन जनरल, 11 स्लीपर, दो थर्ड एसी, एक सेकेंड एसी और एक सेकेंड सह फर्स्ट एसी कोच के साथ ट्रेन चल रही है।

यात्रियों की मांग पर ही लिया गया निर्णय

यात्रियों की मांग पर ही सारनाथ एक्सप्रेस में थर्ड एसी के बोगी लगाने की तैयारी है। इसके बदले पांच स्लीपर कोच को कम किया जाएगा। रेलवे बोर्ड की कोशिश है कि ट्रेनों की रफ्तार 130 से 140 किमी प्रति घंटा हो जाए। इसका ट्रायल भी बिलासपुर-रायपुर-दुर्ग तक किया जा चुका है। स्लीपर कोच खुले होने के कारण हवा भीतर घुसने से ट्रेन की रफ्तार नहीं बढ़ सकती। रफ्तार बढ़ाने के लिए स्लीपर कोच को हटाना जरूरी है। -राकेश सिंह, स्टेशन डायरेक्टर, रायपुर रेलवे स्टेशन

Posted By: Kadir Khan