Raipur Column Sehatnama: एमसीआइ की आंखों में धूल झोंकने की कवायद

Updated: | Wed, 27 Oct 2021 04:05 PM (IST)

Raipur Column Sehatnama: रायपुर। छत्‍तीसगढ़ राज्य में चार शासकीय मेडिकल कालेजों को स्थापित करने की कवायद तेजी से चल रही है। कालेज संचालन से लेकर अस्पताल की व्यवस्था तक कई तरह की चुनौतियां विभाग केसामने आ रही है, लेकिन जल्द से जल्द नेशनल मेडिकल कमीशन से मान्यता भी चाहिए। इसके लिए राजधानी रायपुर के मेडिकल कालेज से कई चिकित्सकों को वहां भेजा गया है, ताकि फैकल्टी की संख्या गिनाकर मान्यता जल्द हासिल हो जाए।

सोच तो सकारात्मक है, लेकिन पेचिदा प्रक्रिया का क्या? अधिकारियों का कहना है भर्ती तो करना चाहते हैं, लेकिन विशेषज्ञ नहीं मिल रहे। वहीं तबादला कर भेजे गए डाक्टरों का कहना है कि न भवन न व्यवस्था। नान क्लीनिक डाक्टर एक बार जाकर वहां काम भी कर लें, लेकिन क्लीनिक डाक्टरों के लिए वहां व्यवस्था तो होनी चाहिए। खैर भेजने से पहले अंदरूनी तौर पर उन्हें बता दिया गया है। आपका स्थानांतरण तो सिर्फ कागजों में ही है साहब।

'पद्म श्री की लालसा में डाक्टर

'पद्म श्री पाने को ललायित एक डाक्टर आजकल वरिष्ठ चिकित्सकों केबीच चर्चा में है। कहा जा रहा है कि इसके लिए इन्होंने संवैधानिक पद पर बैठे लोगों से तक सिफारिश कराकर अपने पत्र केंद्रीय स्तर पर भिजवा चुके हैं। एक चिकित्सक केतौर पर समाज केलिए किए जा रहे कार्य सम्मान केकाबिल है।

लेकिन देश का सर्वोच्च सम्मान में से एक पाने क्या से काफी है? एक ओर अस्पताल में बेहतर व्यवस्था होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन गंभीर हालत में पहुंचने वाले मरीजों को भर्ती केलिए किसी रसूखदारों से सिफारिश लानी पड़ रही है। अपना चेहरा चमकाने केलिए आंकड़ों से छेड़छाड़ कर सरकार की आंखों में धूल झांकने का भी काम किया जा रहा। अंदरूनी तौर पर खोला जाए तो व्यवस्था और भ्रष्टाचार की वजह से अंदर खोखलापन दिखने लगेगा। रसूख के दम पर सम्मान पाने की कोशिश करने वाले लोगों के काम की समीक्षा जरूर हो।

क्यों कार्रवाई से झिझक रहे अधिकारी

स्वास्थ्य विभाग का एक कर्मचारी नेता विभाग केएक शासकीय पद के विरुद्ध लंबे समय तक पत्राचार करता रहा। साथ ही उच्च न्यायालय का हवाला देते हुए उस पद को ही गलत ठहराते हुए संचालक से हमेशा शिकायत करता था। अंतत: अत्यधिक शिकायतों को देखते हुए आला अधिकारी ने उक्त कर्मचारी नेता से इस संबंध में तत्थ्यपूर्ण जानकारी मांग ली। इसकेलिए उसे अधिकारी ने पांच से छह बार मौके भी दिए, लेकिन कहा जा रहा है कर्मचारी नेता ने एक भी मौके पर खूद के तर्कों को सही साबित नहीं कर पाए।

इसे देखते हुए अधिकारी ने उक्त कर्मचारी नेता को आचार संहिता समेत अन्य अधिनियम का उल्लंघन को दोषी मानते हुए संभागीय स्वास्थ्य अधिकारी को कार्रवाई के लिए निर्देशित कर दिया। पर माहभर बाद भी इस संबंध में किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। अब विभाग में दोनों पदों के कर्मचारियों के दूसरे पर आरोप लगाने में लगे हैं।

मिठाई ने बिगाड़ी सेहत

पिछले दिनों भाजपा केएक बड़े नेता का जन्मदिन मनाया गया। वहां लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इसे देखते हुए काफी मात्रा में मिठाई मंगाई गई, लेकिन नेता जी खुद के साथ दूसरों की सेहत का भी अच्छे से ध्यान रखते हैं। अब खुद का तो ठीक है दूसरों की सेहत का इतना ध्यान रखना उनके कर्मचारी को रास नहीं आया। फिर क्या था, जन्मदिन तो धूमधाम से मना, लेकिन उस कर्मचरी को मिठाई ना मिला।

उल्टे बचे हुए आठ-दस पैकेट मिठाई को उसकेमाध्यम से होटल में वापस कराने की जिम्मेदारी भी उसे मिल गई। नाम बड़े दर्शन छोटे वाली बात कहते हुए नाराजगी के साथ उसे श्ार्मिंदगी भी थी कि इतने कम मिठाई को कोई होटल में वापस कैसे करा सकता है। साहब के घर का आदेश पूरा तो करना ही था। अब राजनीति चर्चा में बैठे उनके समर्थकों का इसकी जानकारी होते हुए हंसी ठिठोली फूटते भी नजर आई।

Posted By: Kadir Khan