Raipur Column Shaharnama: छत्‍तीसगढ़ में सस्ती दवा दुकान अच्छी पहल

Updated: | Sun, 24 Oct 2021 12:42 PM (IST)

Raipur Column Shaharnama: रायपुर। राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में खोले गए जेनेरिक दवा दुकान गरीब और मध्यम वर्ग परिवार के लिए वरदान साबित हो रहा है। दुकान में 282 प्रकार की दवा वह भी 62 फीसद छूट पर मिल रही है। जेनेरिक दवा ब्रांडेड की ही तरह कारगर है, लिहाजा यह आम लोगों के पहुंच में है। सौ रुपये कीमत की टेबलेट महज चालीस रुपये में पाकर गरीब पिता की बेटी के चेहरे पर मुस्कान है।

ऐसे कई परिवार है जो कम से कम हजार, डेढ़ हजार की दवाइयां हर महीने बीमार बुर्जुग माता-पिता के लिए खरीदते आ रहे है। अब ये दवाइयां आधी से भी कम कीमत पर मिलने से पैसे की बचत होगी। सस्ती दवा दुकान खोलने की सरकारी पहल काबिले तारिफ है। इस तरह की पहल निजी राशन,साग-सब्जी आदि के लिए भी होनी चाहिए,आखिर पापी पेट का जो सवाल है।

उखड़ेगे अंगद के पांव

राजधानी रायपुर समेत सूबे में सालों से अंगद की पावं की तरह एक ही पुलिस थानों में जमे पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों के मौज के दिन अब जाने वाले है। दरअसल आइजी-एसपी कांफ्रेस में मुख्यमंत्री ने बड़ा फैसला सुनाकर मौज काट रहे अधिकारियों की नींद हराम कर दी है। तबादले के डर से ये अब सहम गए है। रायपुर को ही ले ले,यहां पर कई वर्दी वाले सालों से जमे हुए है।

कुछ तो ऐसे हैं जो तीन साल पूरे होने के बाद आसपास के जिलों में दो,चार, छह महीने काटने के बाद फिर से अपने पुराने ठिकाने पर लौट आते है। ऐसे लोगों पर ही नकेल कसने सूबे के मुखिया ने ढाई साल से एक ही जिले, थाने में जमे वर्दीवालों को चिन्हांकित कर तत्काल तबादला करने का फरमान सुनाया। इस फरमान से शहर के थानों के अंगदों को यह डर सताने लगा है कि कहीं नक्सलगढ़ का रूख ना करना पड़े। अब तक जुगाड़ के दम पर ये शहर में मौज काट रहे थे।

दिल्ली में जमे कारोबारी नेता

छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर उलटफेर की कवायद तेज होते ही शहर के कारोबारी नेता ने दिल्ली की उड़ान भर ली।पिछले दस दिनों से दिल्ली में ही डेरा जमाए बैठे नेताजी को हमेशा यह डर सता रहा है कि कही उलटफेर हो गया तो कारोबार का क्या होगा? जमा जमाया कारोबार के साथ ठाट-बाट और पूछपरख तो कम होगी ही पुराने कारनामें भी खुलने में देर नहीं लगेगी।

ऐसे में नेताजी इस कोशिश में है कि कैसे भी हो दूसरे पाले को साधना पड़ेगा नहीं तो मुश्किल बढ़ेगी।पिछले दिनों इसके लिए कोशिश भी की थी।समाज से जुड़े एक नेता के जरिए बातचीत को आगे बढ़ाया पर बताया जा रहा है कि भाव नहीं मिला। इससे फिलहाल नेताजी सदमें में है और उनका अगला कदम क्या होगा, यह देखना होगा।

निगम के पैसे से बट गए पार्षदों को टेबलेट

रायपुर नगर निगम के 70 पार्षदों और 11 एल्डरमैन को मुफ्त में मिले टेबलेट की चर्चा इन दिनों जोरो पर है।दरअसल डिजीटल इंडिया के सपने को साकार करने के लिए महापौर के आदेश पर निगम के खजाने से करीब सवा करोड़ रुपये में टेबलेट की खरीदी की गई।

दिवाली से पहले बतौर गिफ्ट यह टेबलेट पार्षदों, एल्डरमैन को बांटा गया।तर्क यह दिया जा रहा है कि यह सब कवायद जनप्रतिनिधियों को हाइटेक करने के लिए किया गया है। इससे जनप्रतिनिधि निगम की सामान्य सभा से लेकर सभी योजनाओं की जानकारी आनलाइन प्राप्त कर सकेंगे।

चूंकि मामला गिफ्ट से जुड़ा हुआ था लिहाजा विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा पार्षद दल का कहना है कि आम लोगों के दिए गए टैक्स के पैसे को विकास कार्यों में लगाने के बजाए फिजूलखर्ची किया जा रहा है। जब सभी पार्षदों के पास स्मार्ट फोन पहले से है तो मुफ्त में टेबलेट देने की क्या जरूरत थी।

Posted By: Kadir Khan