Raipur Local Edit: शिक्षा से बंदूक के जरिए दशहत फैलाने वालों को जवाब

Updated: | Sun, 25 Jul 2021 06:05 AM (IST)

रायपुर । Raipur Local Edit: राज्य के बस्तर संभाग में नक्सलियों की मौजूदगी विकास की राह में हमेशा रोड़ा बनती रही है। लोकतंत्र में आस्था नहीं रखने वाली नक्सल विचारधारा ने आदिवासियों को देश-दुनिया से अलग कर रखा है। इस वजह से चाहकर भी वे आगे नहीं बढ़ पाए हैं। केंद्र और राज्य सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सभी बुनियादी सुविधाएं और जरूरतें पूरी करने के प्रयास में जुटी हैं। योजना बनाकर विकास कार्यों को धरातल तक पहुंचाया भी जा रहा है, लेकिन नक्सली अड़ंगा बनते रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है अशिक्षा। सरकार आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। गांव-गांव में स्कूल खोले जा रहे हैं।

सरकार की इस पहल से नक्सलियों की जड़ें कमजोर होती दिखीं तो उन्होंने विद्या के मंदिरों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया। धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार भले ही सड़क नहीं बना पाई, लेकिन गांव-गांव तक स्कूल भवन और रिहायशी स्कूलों का निर्माण किया। वहां मासूम बच्चों ने क, ख, ग, घ... पढ़ना शुरू किया तो नक्सली बेचैन हो उठे। सलवा जुड़ूम आंदोलन बंद होने के बाद बस्तर में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों के जवान तैनात किए गए। नक्सलियों को लगा कि इन्हीं स्कूल भवनों, आश्रमों को फोर्स का कैंप बनाया जाएगा। उनकी आंखों में स्कूल पहले ही खटक रहे थे, लिहाजा उन्होंने उसे निशाना बनाया।

बस्तर संभाग के सर्वाधिक प्रभावित सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर में 186 स्कूलों को नक्सलियों ने ढहा दिया। नक्सलियों की कारगुजारियों की वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई और भविष्य नक्सल अंधेरे की ओर बढ़ता गया। सुरक्षा बलों की मौजूदगी और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच से अब आदिवासी क्षेत्रों के लोगों में जागरूकता बढ़ रही है।

नक्सलवाद को खत्म करने के लिए जहां सरकार लगातार प्रयास कर रही है, वहीं स्थानीय ग्रामीणों का भी साथ मिल रहा है। बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। नक्सलियों द्वारा ढहाए गए विद्या के मंदिरों को ग्रामीण अपनी मेहनत से दोबारा संवारने में जुटे हैं। यह सुखद पल है और सुनहरे भविष्य की नींव भी है। बांस-बल्ली के सहारे विद्या के मंदिर का ढांचा बन गया है। भविष्य में ये आलीशान भवनों का आकार लेंगे। सरकार और सुरक्षा बलों का साथ ग्रामीणों के हौंसले बुलंद कर रहा है।

नक्सल विचारधारा के बीच ग्रामीण अगर हिम्मत दिखाकर अपने संसाधन और खर्च पर स्कूल भवन तैयार कर रहे हैं तो यह उज्ज्वल भविष्य का संकेतहै। राज्य और केंद्र सरकार को भी चाहिए कि ऐसी जगहों में शिक्षकों की पदस्थापना कर अच्छी शिक्षा देने की व्यवस्था करे। गोली का जवाब शिक्षा से देने के लिए तैयार खड़े लोगों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

Posted By: Kadir Khan