Raipur Local Edit: छत्‍तीसगढ़ में किसानों का प्रेरणादायी प्रयोग, ई-मार्केटिंग से बढ़ाई आमदनी

Updated: | Wed, 27 Oct 2021 05:20 PM (IST)

Raipur Local Edit: रायपुर। उत्तरी छत्तीसगढ़ के छोटे से जिले जशपुर के सन्ना क्षेत्र के किसानों ने अपनी मेहनत की कमाई को दलालों के हाथ में कम दाम पर बेचने की परंपरागत व्यवस्था को ध्वस्त करते हुए वैकल्पिक प्रबंध कर लिया है। यह दो पीढ़ियों का संगम है, जिसके तहत करीब एक हजार किसान एकजुट हुए हैं और दलालों को औने-पौने दाम पर बिकने वाली उपज अब ई-मार्केटिंग के जरिए बाजार की उच्चतम कीमत पर बिक रही है।

इन किसानों ने गत वर्ष बड़े पैमाने पर मिर्च और टमाटर की खेती की। अब तक यही होता आया था कि फसल लगाने के दौरान ही आसपास के जिलों और पड़ोसी राज्यों पश्चिम बंगाल, झारखंड एवं उत्तर प्रदेश के दलाल किसानों से संपर्क कर लेते थे। बाजार की वास्तविक स्थिति के बारे में जागरूक नहीं होने के कारण किसान आसानी से दलालों के चंगुल में आ जाते थे और औने-पौने भाव में ही अपनी उपज बेच देते थे।

फसल की लागत भी नहीं निकल पाने के कारण किसानों का धीरे-धीरे खेती से मोहभंग भी होने लगा था। किसान अपनी उपज सड़कों पर भी फेंकने को मजबूर होते थे। खासकर जशपुर में हर साल कई क्विंटल टमाटर फेंक दिया जाता था। कुछ किसान तो आत्मघाती कदम भी उठाने को मजबूर हो चुके हैं। अब नई पीढ़ी के सामने आने के बाद धीरे-धीरे अन्न्दाताओं की सोच में बदलाव आने लगा है।

इसका जीवंत उदाहरण सन्ना गांव के वे एक हजार किसान हैं, जो ई-मार्केटिंग अपनाकर आर्थिक रूप से समृद्ध हो चुके हैं। चालू वर्ष में ही किसानों ने ई-मार्केटिंग के माध्यम से एक करोड़ रुपये मूल्य से अधिक के मिर्च और टमाटर बेचे हैं। फार्मर प्रोड्यूसर आर्गनाइजेशंस (एफपीओ) के माध्यम से युवा किसान आनलाइन मंडियों के भाव पर नजर रखते हैं तथा बोली लगाकर सौदा भी कर रहे हैं।

पूरी तरह से संतुष्ट होने के बाद ही वे अपनी उपज बेचते हैं। निश्चित रूप से यह सुखद खबर है कि किसानों को अपनी मेहनत की उपज दलालों को औने-पौने भाव में नहीं बेचनी पड़ रही है। यहां बताना होगा कि सरकारी प्रयासों के बाद भी यदि किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है तो उन्हें भी हर परिस्थिति के लिए जागरूक रहना होगा।

बिना सरकारी मदद के भी इंटरनेट से जुड़ी तकनीक को अपनाकर अपनी फसल कहीं भी उच्चतम कीमत पर बेच सकते हैं। छत्तीसगढ़ के उन सभी किसानों के लिए यह नजीर है। सरकार की तरफ से भी ऐसे किसानों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

ऐसे किसानों को अधिक सहयोग की जरूरत है, जो बगैर किसी प्रोत्साहन के अपनी स्थिति में बदलाव के लिए नवाचार कर रहे हैं। जाहिर है कि जब अन्न्दाता समृद्ध होंगे तो देश और प्रदेश भी तरक्की की राह में एक कदम और आगे बढ़ेंगे।

Posted By: Kadir Khan