Raipur Religious News: संपत्ति का सुख भोगना है तो दान-दक्षिणा करें

Updated: | Mon, 02 Aug 2021 05:26 PM (IST)

रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। Raipur Religious News: संपत्ति चाहे किसी भी रूप में प्राप्त हुई हो। पैतृक रूप से मिली हो अथवा स्वयं की मेहनत से कमाई हो। उस संपत्ति में से कुछ न कुछ भाग निर्धनों की भलाई में खर्च करना चाहिए। देवालय बनाने में, निर्धन बच्चों को शिक्षा दिलाने में या कुआं, बावली, तालाब खुदवाने में खर्च करना चाहिए। यदि दान, धर्म में खर्च नहीं करेंगे तो संपत्ति का वास्तविक सुख नहीं भोग पाएंगे। उक्त संदेश साध्वी हंसकीर्ति ने विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञान वल्लभ उपाश्रय में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में दिया।


धन की तीन गतियां दान, भोग और मोक्ष

साध्वी हंसकीर्तिश्रीजी ने कहा कि हर पाषाण में श्रेष्ठ प्रतिमा बनने की योग्यता होती है। मायने रखता है मूर्तिकार कितना योग्य है। सारे सदगुण हमारे भीतर हैं। हमने ही उन्हें कषायों के आवरण से ढंक दिया है। जिस व्यक्ति को सम्यक दर्शन की प्राप्ति हो जाती है उसका इस संसार में मन लगना कठिन है। उस व्यक्ति को सिर्फ मोक्ष की चाह होती है। जो आनंद किसी युवा को संगीत सुनकर मिलता है, वही आनंद समकित को शास्त्रों का अध्ययन करने से प्राप्त होता है। समकित व्यक्ति कभी धन के पीछे नहीं भागता। समकित या तो लक्ष्मी नंदन बनता है या लक्ष्मी पति। उसे पर्याप्त धन मिलता है और वह उसका सदुपयोग कर अपने जीवन को सफल बनाता है। वहीं जो लोग लक्ष्मी दासी होते हैं उनके पास लक्ष्मी होते हुए भी वे उसका भोग नहीं कर पाते और उनकी समस्त संपत्ति का नाश हो जाता है।

बीता हुआ दिन फिर नहीं लौटेगा

साध्वी रम्यकगुणाश्रीजी ने कहा कि सूर्योदय बचपन है, युवावस्था दोपहर, वृद्धावस्था शाम और मृत्यु रात्रि है। सूर्योदय हुआ है तो सूर्यास्त होना तय है जीवन मिला है तो मृत्यु भी तय है। जिस प्रकार बीता हुआ दिन फिर नहीं लौटता, उसी तरह जीवन एक बार बीत गया तो फिर नहीं आएगा।

Posted By: Kadir Khan