Raksha Bandhan 2021 CG Special: इस रक्षाबंधन बीज, बांस और गोबर से बनी राखी सजेगी भय्या की कलई पे

Updated: | Tue, 03 Aug 2021 04:58 PM (IST)

पंकज दुबे।

रायपुर ( नईदुनिया ) Raksha Bandhan 2021 CG Special: रक्षाबंधन पर्व को लेकर जहां राजधानी के बाजारों में रंग-बिरंगी राखियां दुकानों में सजने लगी है। वहीं दुसरी तरफ सेरीखेड़ी स्थित मल्टी यूटिलिटी सेंटर में भी चार तरह के खास राखियां ग्राहकों के लिए तैयार हो रही है। जोकि पिछले वर्ष की तरह ही इस बार भी राजधानी में गोबर और बीज के साथ कई अनूठी राखियां खास आकर्षण का केंद्र बन रही हैं, जिसमें छत्तीसगढ़ की संस्कृति को समेटे हुए बांस, चंदन, हल्दी, कुमकुम और रेशम से बनी वैदिक राखियों को भी तैयार किया जा रहा है।

इस बार लगभग पांच हजार बीज, बांस, गोबर की राखी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। पूर्ण लाकडाउन खत्म होने के बाद करीब दो महीनों से समूह की ये महिलाएं रक्षाबंधन को लेकर ये राखियां बना रही हैं। इसमें आसपास के गांव की करीब 10 महिलाएं काम कर रही हैं,जो अब तक लगभग तीन हजार से ज्यादा राखियां बना चुकी हैं।

लक्ष्य को पूरा करने में जुटी महिलाएं

लाकडाउन का लम्बा समय बीतने के बाद बिहान समूह की महिलाएं रक्षाबंधन त्योहार को देखते हुए समय पहले लक्ष्य को पूरा करने में जुट गई है। इससे न सिर्फ उनको वापस रोजगार मिल सका है बल्कि वे इन राखियों को बेचकर समूह में अच्छी कमाई भी करेगी। उजाला समूह की रंजना देवी महिला ने बताया कि बीस से पचास रुपये की राखी तैयार हो रही है। इन राखियों को राजधानी के प्रमुख जगहों पर स्टाल लगाकर बिक्री के लिए रखा जाएगा।

गाेठानों में भी लगेंगे राखी के स्टाल

सेरीखेड़ी डाेम में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत तैयार हो रही इन राखियों की जिले के गोठानों में बिक्री के लिए रखा जाएगा, जहां बिहान योजना के तहत समूह से जुड़ी महिलाएं राखी के स्टाल पर रहेंगी, जिससे उन्हें ग्राहकों को कैसे राखी बेचना है, मार्केटिंग आदि की जानकारी भी मिलेगी। हालांकि लाकडाउन का असर समूह की महिलाओं के माध्यम से तैयार हो रहे उत्पाद पर भी पड़ा है। क्योंकि पिछले वर्ष यही लक्ष्य दस हजार तक रखा गया था,जिससे ग्राहकों के माध्यम से काफी अच्छा रिसपांस भी मिला था।

चार तरह की खास राखियां बन रही

जिला पंचायत रायपुर के सीइओ मयंक चतुर्वेदी के मुताबिक ये महिलाएं चार तरह की खास राखियां बना रहीं हैं।इसमें पहली राखी बांस के आधार पर गोबर में बीज को रखकर राखी बनाई गई है फिर इस में पौधा लग सकता है। दूसरी राखी में बांस और रेशम का काम है, तीसरी तरह की राखी में बांस और क्रोशि के धागे से काम किया गया है। जबकि चौथी तरह की इस खास राखी जोड़ों के लिए बनाई गई है, इसे कुमकुम-अक्षत राखी कहा गया है। इसके अलावा हल्दी, कुमकुम, चंदन से बनीं वैदिक राखियां भी छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू समेटे हुए हैं।

Posted By: Kadir Khan