Religious Message In Raipur: खुद को सुधारें, दूसरों की चिंता न करें

Updated: | Mon, 02 Aug 2021 05:30 PM (IST)

रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। Religious Message In Raipur: पहले अपने-आपको सुधारें फिर औरों को सुधारने की चिंता करें। प्रभु परमात्मा की वाणी, जिनवाणी को जब तक अंतरमन से महसूस नहीं करेंगे तब तक वह जीवन में आत्मसात या हृदयंगम नहीं हो पाएगी। पढ़ना, सुनना और बोलना ये तीनों क्रमशः दिमाग, कान और रसना इंद्रिय के विषय हैं जब तक हम उसे महसूस नहीं करेंगे तब तक पढ़ा, सुना और बोला हुआ चरितार्थ नहीं होगा। यह संदेश सदरबाजार स्थित श्री ऋषभदेव जैन श्वेतांबर मंदिर में साध्वी शुभंकरा ने दिया। मालूम हो की छत्तीसगढ़ की राजधानी में बीते काफी समय से रोजाना सदरबाजार स्थित श्री ऋषभदेव जैन श्वेतांबर मंदिर में साध्वी शुभंकरा अपने संदेश में मानव जीवन के उद्धार से संबंधित संदेश दे रहीं हैं।

साध्वीश्री ने कहा कि यह मनुष्य जीवन हमें मुश्किल से मिला है, इस दुर्लभ मानव भव का सदुपयोग स्वयं को सुधारने के लिए करें। दूसरों को सुधारने की कोशिश करोगे तो तुम्हें असफलता ही मिलने वाली है। किसी कवि ने कहा है- ‘अरे सुधारक जगत के, चिंता मत कर यार, तेरा मन ही जगत है पहले इसे सुधार।’

श्रद्धा में कमी न हो

साध्वी सुभद्रा ने कहा कि मोक्ष में जाने के लिए सर्वप्रथम हमारी इच्छा, हमारे भाव प्रबल हो तो वह व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। बहुमान भाव हमारा जितना मजबूत होगा, श्रद्धा जितनी मजबूत होगी। सफलता उतनी ही आपके कदम चूमेगी। इसीलिए जीवन में विधि, ध्यान क्रिया कम हो चलेगा, लेकिन श्रद्धा-बहुमान में कभी कमी नहीं आनी चाहिए। परमात्मा के साथ-साथ बड़ों के प्रति, माता-पिता के प्रति हृदय में बहुमान भाव होना ही चाहिए।

Posted By: Kadir Khan