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RTE Fee Scam: खाते में लौटाए 74 में से 40 लाख रुपये

Updated: | Fri, 26 Feb 2021 11:52 AM (IST)

रायपुर। RTE Fee Scam: शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत करीब 74 लाख रुपये के गड़बड़झाले के मामलेेे में संदिग्ध खातेदारों ने अब रकम वापस करनी शुरू कर दी है। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) जीआर चंद्राकर के कार्यकाल में किन-किन निजी स्कूलों को कितनी राशि भेजी गई है, इसका फिजिकल सत्यापन भी कराया जाएगा। अभी तक विभाग के खाते में करीब 40 लाख स्र्पये वापस हुए हैं।

मामले में स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अभी तक इन खातेदारों का डीईओ कार्यालय के किन-किन लोगों से तालुकात है, इस बिंदु पर कोई जांच नहीं की है। शिक्षा विभाग के अफसरों को यह भी पता नही है कि विभाग के पास इन खातेदारों का नाम कहां से आया है?

जानकारों का मानना है कि यदि खातेदारों से पूछताछ की जाए तो डीईओ कार्यालय से इन खातेदारों के बीच किन-किन कर्मचारी और अधिकारी के नजदीकी संबंध हैं, इसका पता लगाया जा सकता है। मामले में शिक्षा विभाग ने चुप्पी साध ली है। स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री डा. प्रेेमसाय सिंह टेकाम का कहना है कि जिसने भी गड़बड़ी की है, उस पर कार्रवाई की जाएगी ।

सरकारी खाते में निजी खाते से जमा की रकम

दिलचस्प बात यह है कि डीईओ कार्यालय के सरकारी यूको बैंक के खाते में निजी लोगों की रकम वापस की जा रही है। बैंक के सूत्रों ने बताया कि बैंक में जिन खातेदारों ने आरटीई की फीस वापस की है, उनमें कुछ ऐसे भी हैं, जो कि अपने मूल खाते के बजाय किसी दूसरे खाते से रकम वापस की है। सवाल यह है कि यदि उनके मूल खाते में रकम थी और उन्होंने यह रकम नहीं निकाली थी तो उसी खाते से ही रकम वापस क्यों नहीं कराई गई? यूको बैंक के प्रबंधक बीएम कोहली का कहना है कि जब तक बैंक खाता के मालिक की ओर से ऐसा आवेदन नहीं आता है, तब तक किसी भी व्यक्ति से राशि जमा कराई जा सकती है।

कितनी राशि किन स्कूलों को भेजी, होगी जांच

स्कूल शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा के संयुक्त संचालक संजीव श्रीवास्तव को आरटीई की राशि की जांच करने के लिए निर्देश दिए हैं। बताया जाता है कि पिछले तीन सालों से 15 से 16 करोड़ स्र्पये डीईओ कार्यालय रायपुर को भेजा गया था। इनमें करीब डेढ़ सौ स्कूल ऐसे हैं, जिनको अभी तक 2017, 2018 और 2019 की आरटीई में बकाया राशि नहीं मिली है। बता दें कि 28 जनवरी 2021 को डीईओ कार्यालय से आठ निजी स्कूलों को आरटीई की राशि का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से किया गया है। इनमें ज्यादातर स्कूल दो से पांच साल पहले ही बंद हो चुके हैं। जिन स्कूलों को लाखों की राशि दी गई है, वहां आरटीई के एक भी बच्चे नहीं पढ़ रहे हैं, न ही कोई रकम ही बकाया थी। पता चला कि ये राशि इन संस्थाओं के खाते में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत खाते में डाली गई थी।

संयुक्त संचालक बोले-जांच करेंगे

समग्र शिक्षा एवं जांच अधिकारी एवं संयुक्त संचालक संजीव श्रीवास्तव का कहना है कि उच्चाधिकारियों के निर्देश के अनुसार जितने समय की आरटीई राशि के भुगतान की जांच करने के लिए कहा गया है उन सब की जांच की जाएगी। अभी विधानसभा की प्रक्रिया होने के कारण थोड़ी देर हो गई है।

Posted By: Azmat Ali
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