Raipur Column Nagarghadi: वेब सीरीज में दिखने को फोकट में घंटों बैठे, शूटिंग देखना भी नहीं हुआ नसीब

Updated: | Fri, 24 Sep 2021 09:30 AM (IST)

श्रवण शर्मा, रायपुर। Raipur Column Nagarghadi: सालों बाद शहर में ऐसा मौका आया जब बालीवुड के निर्देशक और कलाकार शूटिंग करने आए। वेब सीरीज में छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के सीन में दिखाई देने का सब्जबाग दिखाकर युवक-युवतियों को बुलाया गया। एक झलक ही दिखने की चाहत में बेचारे घंटों आडिटोरियम में बैठे रहे, लेकिन शूटिंग रात तक शुरू नहीं हुई। भूखे-प्यासे युवा चिढ़ते-कुढ़ते वेब सीरीज बनाने वालों को गालियां देते बाहर निकले। कुछ युवतियां छत्तीसगढ़ी वेशभूषा में पारंपरिक आभूषण पहनकर आई थीं।

इनमें से एक ने कहा- भले ही 12 बज जाए, शूटिंग देखकर ही लौटेंगीं। हो सकता है किस्मत साथ दे दे और उन्हें भी मौका मिल जाए। दूसरे ने तंज कसा- शेखचिल्ली के ख्वाब मत देखो और घर चलो। किस्मत ही खराब है जो सात घंटे से मक्खी मार रहे हैं। अब फिल्मों में दिखने का लालच कभी नहीं करेंगे। बहुत भारी पड़ गया आना।

छूट मिलते ही शहर का बजा बैंड

कोरोना काल के सख्त नियमों के चलते बिना तामझाम के गणेश पर्व सादगी से निपट रहा था। विसर्जन के एक दिन पहले प्रशासन ने नेताओं के दबाव में बैंड बजाने की छूट दे दी। फिर क्या था, जो लोग सादगी से विसर्जन करने जाने वाले थे, उन्होंने अगले दिन के लिए टाल दिया। रात में ही ढोल-धमाल वालों की बुकिंग कर दी। धमाल वालों ने भी मौके की नजाकत को भांपते हुए दुगुनी रकम मांगी।

युवाओं को दुगुनी रकम भी मामूली लगी। दूसरे दिन से शहर भर में बजने वाले बैंड ने आम लोगों का बैंड बजाकर रख दिया। किसी को उम्मीद नहीं थी कि अनुमति मिलने के बाद वैसा ही नजारा दिखेगा, जैसा हर साल रहता है। शहरवासी परेशान होते हुए भी इस बात को लेकर खुश थे कि कोरोना की दहशत से मुक्त होकर युवक-युवतियां कम से कम नाच तो रहे हैं।

शादी और मेहमान की पाबंदी हटी तो खिले चेहरे

जिन परिवारों में 100 से अधिक रिश्तेदार हैं, वहां के लोग बड़े दुखी थे कि शादी का मजा कैसे ले पाएंगे। लेकिन जैसे ही कलेक्टर ने शादी भवन व होटल में क्षमता के हिसाब से आधे लोगों के शामिल हो सकने की अनुमति दी, ऐसे परिवार के लोगों के चेहरे खिल उठे। जिन परिवारों में तीन-चार सौ मेहमानों की तैयारी है, वे अब सात-आठ सौ की क्षमता वाले भवन और होटल की तलाश कर रहे हैं।

इससे भवन और होटल संचालक भी खुश हैं कि डेढ़ साल से लगभग बंद पड़े कारोबार में एक बार फिर रौनक आएगी। आमदनी पर लगा ग्रहण छंटेगा। लोगों को बस इस बात का डर सता रहा है कि कोरोनाकाल में जैसे पेट्रोल, खाद्य तेल, अनाज आदि के दाम बढ़ गए, वैसे ही घोड़ी, बैंड, भवन और होटल का किराया बढ़ गया तो तेल निकल जाएगा।

हंगामा बना गले की फांस

15 दिन पहले महिला आयोग के कर्मी द्वारा एक डाक्टर से मारपीट करने का विरोध जताते हुए डाक्टरों ने महिला आयोग अध्यक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया था। दबाव बनाकर कर्मी को तो पुलिस से पकड़वा दिया लेकिन अब डाक्टरों में दहशत बैठ गई है, क्योंकि उन्होंने एक संवैधानिक पद पर बैठी धाकड़ नेता का अपमान किया था। कहा जा रहा है कि जिस डाक्टर के खिलाफ महिला ने बदतमीजी करने की शिकायत की थी, उस मामले में डाक्टर घिर सकता है और उसे सजा मिल सकती है।

उस डाक्टर का लाइसेंस तक रद हो सकता है। यदि ऐसा हुआ तो डाक्टर बिरादरी की फजीहत होगी। इस डर की वजह से राजधानी के प्रभावशाली डाक्टर मिलकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश में हैं। राज्य के मुखिया तक एप्रोच लगाई गई है। आने वाले दिनों में हो सकता है माफी मांगने से मामला खत्म हो जाए।

Posted By: Shashank.bajpai