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आत्मनिर्भर भारत को नई पहचान देंगे युवा: महेंद्र नाथ पाण्डेय

Updated: | Tue, 19 Jan 2021 02:52 PM (IST)

किसी भी देश के आॢथक एवं सामाजिक विकास में कौशल का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। कौशल एक ऐसा साधना है, जिसके द्वारा युवाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही उद्योगों की मांग के अनुसार कुशल कार्यबल तैयार करके स्किल गैप को आसानी से भरा जा सकता है। कौशल सिर्फ एक व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके साथ-साथ समाज और राष्ट्र को भी आगे बढ़ाता है। सही अर्थों में देखा जाए तो भविष्य में कौशल ही वह साधन होगा, जो युवा शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने में उसकी मदद करेगा और विश्व पटल पर उसे एक नई पहचान दिलाएगा। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय राज्य सरकारों, प्रशिक्षण भागीदारों और अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ मिलकर युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। आज इसी का परिणाम है कि विभिन्न कौशल संस्थानों में प्रशिक्षण ले रहे युवाओं ने अपनी क्षमता एवं कुशलता का परिचय देते हुए नवाचार के क्षेत्र में अनेक नए प्रयोग किए हैं, जो भविष्य में अन्य छात्रों के लिए प्रेरणादायी साबित होंगे। हमारे युवाओं में वह सामथ्र्य एवं हुनर है, जिसके बल पर भारत को विश्व की कौशल राजधानी बनाया जा सकता है। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2030 तक भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा कार्यबल होने की उम्मीद है। इसमें सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की होगी। इस युवा कार्यबल को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हेंं भविष्य के लिए तैयार किया जा सकता है, ताकि रोजगार के नए अवसरों में तेजी से वृद्धि की जा सके। कौशल के द्वारा ही हम 21वीं सदी के नए भारत की नींव रख सकते हैं। कौशल हमें रोजगार के अनेक अवसर प्रदान करता है। साथ ही स्व-रोजगार के लिए भी प्रेरित करता है। इसमें वह शक्ति है, जिसके द्वारा हम भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। कौशल के द्वारा युवा अपने सपनों को साकार कर सकते हैैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को प्रासंगिक रहने के लिए 'स्किल, अपस्किल और रीस्किलÓ का मंत्र दिया था। इस मंत्र का उपयोग कर युवा दूसरों से हटकर अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैैं।

युवाओं को नई-नई तकनीकों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने और जिला स्तर पर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) 3.0Ó को पिछले साल अक्टूबर/नवंबर में कुछ अहम दिशानिर्देशों के साथ लांच किया गया। इस योजना का लक्ष्य वित्तवर्ष 2020-21 के दौरान आठ लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षित करना है। यह मांग और उद्योगों पर आधारित एक ऐसी योजना होगी, जो आधुनिक कौशल पर काम करेगी और जिला स्तर पर युवाओं को सशक्त बनाएगी। इसके अंतर्गत जिला स्तर पर उद्योगों एवं अन्य क्षेत्रों की मांग के आधार पर जॉब की पहचान की जाएगी। साथ ही जिला स्तर पर जिला कौशल समिति (डीएससी) का गठन किया जाएगा। ये समितियां उद्योगों की मांग के अनुसार स्थानीय स्तर पर स्किल्स की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। विभिन्न स्थानों पर कौशल मेलों का भी आयोजन करेंगी जिसमें युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और पाठ्यक्रमों के बारे में अवगत कराया जाएगा। सभी उम्मीदवारों को प्लेसमेंट, स्वरोजगार और शिक्षुता के समान अवसर प्रदान करने में भी अपनी भागीदारी निभाएंगी। इस योजना के अंतर्गत संकल्प प्रोजेक्ट के द्वारा स्थानीय स्तर पर श्रमिकों को प्रमाणित किया जाएगा और बड़े स्तर पर उन्हेंं स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएंगे। इसमें राज्य कौशल विकास मिशन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में 'स्किल इंडिया मिशनÓ की शुरुआत की थी। इस मिशन का उद्देश्य युवाओं का कौशल विकास कर उन्हेंं रोजगार के स्थायी अवसर प्रदान करना था। आज इस मिशन के द्वारा प्रत्येक वर्ष एक करोड़ से अधिक युवाओं का कौशल विकास किया जा रहा है। इसके अलावा प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के द्वारा युवाओं को नवीन तकनीकों पर आधारित कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इसके अंतर्गत अब तक एक करोड़ से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है और लाखों लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान किए गए हैं। आज देश भर में 700 से अधिक जिलों में 26,000 से अधिक प्रशिक्षण केंद्रों का एक मजबूत नेटवर्क स्थापित किया जा चुका है। जहां पर युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के साथ-साथ उन्हेंं आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

एक अनुमान के मुताबिक भारत में 48.7 करोड़ श्रमिक हैैं। आज भी हमारे देश में ऐसे श्रमिकों की संख्या अधिक है, जो अपने काम में निपुण तो होते हैैं, लेकिन प्रमाणित नहीं होते हैैं। इसीलिए कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय संकल्प प्रोजेक्ट के द्वारा ऐसे श्रमिकों को प्रमाणित कर रहा है, ताकि उन्हेंं भविष्य में बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें। इसके साथ ही भविष्य के कौशल निर्माण के लिए भी श्रमिकों को तैयार किया जा रहा है, ताकि उन्हेंं आत्मनिर्भर बनाया जा सके। हमारी महत्वपूर्ण पहलों में से एक आरपीएल (रिकगनाइजेशन ऑफ प्रायर लॄनग) के द्वारा भी श्रमिकों के हुनर को एक अलग पहचान मिल रही है। हाल ही में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार आरपीएल प्रमाणीकरण के बाद लगभग 47 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया है कि उनकी आय में वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं, नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार जिन उम्मीदवारों ने आरपीएल में प्रशिक्षण प्राप्त किया है उनमें से 59 प्रतिशत उम्मीदवारों ने स्वीकार किया है कि वह उनके कौशल को सशक्त बनाता है और बाजार में उन्हेंं रोजगार के बेहतर अवसर दिलाने में उनकी मदद करता है।

वास्तव में देश के आॢथक एवं सामाजिक विकास की गति को बढ़ाने के लिए हम संकल्पबद्ध हैैं। हम एक ऐसे नए भारत के निर्माण की ओर अग्रसर हैं जिसे आत्मनिर्भर भारत के नाम से पहचाना जाएगा। हमारा उद्देश्य जिला स्तर पर अधिक से अधिक उम्मीदवारों को कौशल विकास योजना के साथ जोडऩा है, ताकि युवाओं का कौशल विकास कर उन्हेंं रोजगार के स्थायी अवसर प्रदान किए जा सकें। कुशल युवा ही आत्मनिर्भर भारत के विजन को नई दिशा प्रदान कर सकते हैैं।

(लेखक कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्री है।)

Posted By: Arvind Dubey
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