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मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में जंगल बचाने के लिए वनरक्षक कर रहा यह महती प्रयास

Updated: | Thu, 10 Jun 2021 07:14 AM (IST)

गुनेश्वर सहारे, बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में वनरक्षक वनरक्षक रूपलाल तेकाम के प्रयास से वृक्षों की कटाई रुक गई है। आलम यह है कि वह 2,250 एकड़ में फैले जंगल में 11 लाख 25 हजार वृक्षों का रखवाला बन गया है। जंगल से कटाई रोकने के लिए उसने गांव-गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों को समझाया। इसके चलते ग्रामीण भी एकजुट होकर इस काम में जुट गए। तीन साल से सात गांवों में लकड़ी कटाई का कोई नया मामला दर्ज नहीं हुआ है।

तेकाम बताते हैं पूर्व बैहर सामान्य के पालडोंगरी, चीतलपानी, कटियानाला, बांधाटोला, रेहंगी, नेवरगांव और भीमजोरी में 2,250 एकड़ के विस्तृत जंगल में 11 लाख 25 हजार वृक्ष हैं। पहले ग्रामीण इन जंगलों में पेड़ों की कटाई करते थे। वर्ष 2018 में यहां पदस्थ हुए तबसे कटाई रोकने ग्रामीणों को बुलाकर चौपाल लगाते रहे। उन्हें समझाते रहे कि जंगल होंगे तो समय पर बारिश होगी।

ग्रामीण वृक्षों को काटेंगे तो वन विभाग उनके खिलाफ अपराध दर्ज करेगा। वृक्ष काटने पर सजा भी हो सकती है। माह में दो बार चौपाल लगाकर जानकारी देते रहे। इसका नतीजा एक साल में ही दिखने लगा। फिर सातों गांव में युवाओं की टीम तैयार कर वन सुरक्षा समिति बना दी, जिससे युवा खुद जंगल की देखरेख करने लगे। वे ही किसी को वृक्ष काटने नहीं देते। साथ ही पर्यावरण संरक्षण करने हर साल पौधारोपण भी कर रहे है।

गांव का जंगल होना जरूरी

भीमजोरी के राजेश मरकाम, कृष्ण कुमार तेकाम, राजू मरकाम ने बताया वनरक्षक जबसे उनके गांव की बीट में पदस्थ हुए हैं, जंगल बचाने की समझाइश देते रहते हैं। तीन साल से वे वन सुरक्षा समिति से जुड़े है और खुद ही जंगल की रक्षा करते हैं। जरूरत पड़ने पर मोबाइल से वनरक्षक को अवगत कराते हैं। जंगल रहने से समय पर बारिश होती है, औषधि वाले वृक्ष से जैसे कटुज की छाल निकालकर पेट विकार संबंधी इलाज कर लेते हैं। महुआ के वृक्ष से महुआ, चारा के वृक्ष से बीजी निकालना, सलाई के वृक्ष से गोंद निकालने का काम मिलता है। इससे ग्रामीण भी वनों का महत्व समझ गए। इससे कटाई रूकी और जंगल हरियाली से लहलहा रहा है।

इनका कहना है

वनरक्षक की सजगता से जंगल की कटाई रूकी और ग्रामीण भी वृक्षों का महत्व समझने लगे। यह सराहनीय है। वनों को बचाने सबको आगे आना चाहिए। तभी पर्यावरण संरक्षण हो सकेगा। हर साल सभी लोगों को एक-एक पौधा लगाना चाहिए।

एनके सनोड़िया, सीसीएफ बालाघाट

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay
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