Betul news: देश के पहले सोलर विलेज बाचा के ग्रामीणों के प्रयासों को राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सराहा

Updated: | Tue, 03 Aug 2021 03:14 PM (IST)

Betul news: बैतूल, नवदुनिया प्रतिनिधि। गांवों में भारत की आत्मा बसती है, इसका आदर्श बैतूल जिले का गांव 'बाचा' है। यहां आकर ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे मैं कुदरत की गोद में आ गया हूँ। यह बात मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मंगलवार को देश के पहले सोलर विलेज बैतूल जिले के ग्राम बाचा में ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि देश के विकास में गांवों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हम सबको यह तय करना चाहिए कि सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर आर्थिक उन्नति करें और सभी को लाभ दिलाने का प्रयास करें। सरकार के प्रयास पूरी तरह से तभी सफल होते हैं जब समाज पूरा सहयोग प्रदान करे। केंद्र औऱ प्रदेश सरकार की तत्तपरता से दूरस्थ अंचलों में बसे लोगों को सभी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि पहले ग्रामीणों के लिए पैसा तो आता था लेकिन बीच में ही गड़बड़ हो जाती थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसी व्यवस्था बनाई है कि अब हर हितग्राही के बैंक खाते में सीधे राशि जमा हो रही है। कोरोना महामारी से सबक लेकर अधिक से अधिक पौधारोपण करने की सीख देते हुए राज्यपाल ने कहा कि गांव, सड़क किनारे पौधे लगाएं और उन्हें पालने का संकल्प लें, ताकि वे वृक्ष बनकर आने वाली पीढ़ी को प्राणवायु दे सकें।

स्कूल परिसर में रोपा रुद्राक्ष का पौधा : ग्राम बाचा के माध्यमिक स्कूल परिसर में राज्यपाल ने रूद्राक्ष के पौधे का रोपण किया और बच्चों को चॉकलेट बांटी। उन्होंने परिसर में आजीविका मिशन की महिला समूह द्वारा बनाई सामग्री का अवलोकन किया और जानकारी ली कि कैसे सामान बनता है और इससे क्या फायदा उन्हें होता है। महिलाओं ने बताया कि इससे उन्हें डेढ़-दो सौ रुपये प्रतिदिन का फायदा होता है। गांव की चौपाल पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचने पर आदिवासी परंपरा से राज्‍यपाल का स्वागत किया गया। इसके साथ ही राजभवन से आई टीम ने भी परंपरागत रूप से उनकी आगवानी की।

राज्यपाल पटेल ग्राम के अनिल उइके के निवास पर भोजन करने पहुंचे। यहां उन्होंने भोजन में कुटकी की खीर, तुअर की घुंघरी, मक्के की रोटी, गिलकी की सब्जी और दाल-चावल खाए। इस दौरान उनके साथ सांसद दुर्गादास उइके, विधायक योगेश पंडाग्रे, मोहन नागर, बुधपाल सिंह ठाकुर, सरपंच राजेंद्र कवड़े, अनिल उइके की मां शांतिबाई उइके ने भी भोजन किया। यहां राज्यपाल ने घर में सौर ऊर्जा से चलने वाला इंडक्शन चूल्हा भी देखा और भोजन बना रही महिलाओं से चर्चा कर जाना कि वे इस पर भोजन कैसे बनाती है, इसके लिए सब्सिडी मिली क्या और इंडक्शन चूल्हे से क्या-क्या लाभ है।

Posted By: Ravindra Soni