Against Privatization: निजीकरण के खिलाफ प्रदेश के बिजली कर्मचारी हुए एकजुट, भोपाल व इंदौर सहित अन्य जिलों में किया विरोध दर्ज।

Updated: | Tue, 27 Jul 2021 08:41 PM (IST)

Against privatization: भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। बिजली बिजली वितरण कंपनियों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ प्रदेश भर के बिजली कर्मचारी एकजुट है। ये कर्मचारी विरोध दर्ज करवा रहे हैं। इनकी मांग है कि बिजली कंपनियों का निजीकरण किसी भी स्थिति में ना किया जाए। कर्मचारियों ने प्रस्तावित बिजली कंपनियों के निजीकरण के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाया है और संयुक्त मोर्चा के बैनर तले भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर समेत अन्य जिलों में विरोध दर्ज करवाया जा रहा है। बीते दिनों बिजली कंपनियों के कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम बिजली कंपनियों के एमडी को ज्ञापन भी सौंपा हैं। अब फिर से विरोध दर्ज कराया जा रहा है।

5 सूत्रीय मांगों को लेकर संयुक्त मोर्चा फिर आया सामने

- केंद्र सरकार द्वारा बिजली कम्पनियों के निजीकरण के लिए संसद में लाये जा रहे "इलेक्ट्रीसिटी एमेंडमेंट बिल 2021" को वापस लिया जाए।

- संविदा, आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण किया जाए।

- कोरोना योद्धा मृतक बिजली कर्मचारियों के आश्रितों को मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप 50 लाख रुपये का मुआवजा व अनुकम्पा नियुक्ति दी जाए।

- केन्द्र के अनुरूप मंहगाई भत्ता दिया जाए।

17 संगठन मिलकर कर रहे मध्यप्रदेश में विरोध

बिजली कंपनियों के प्रस्तावित निजीकरण का विरोध प्रदेश भर के 17 कर्मचारी संगठन मिलकर कर रहे हैं। यह सभी कर्मचारी प्रदेश की विभिन्न बिजली कंपनियों से जुड़े हैं। इनमें अभियंताओं, तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों सहित संविदा व आउटसोर्स कर्मचारी शामिल है। सरकार व प्रबंधन से मनवाने के लिए संयुक्त मोर्चा का गठनकर आंदोलन का शंखनाद किया है। आंदोलन के अगले चरण में सात अगस्त को सम्पूर्ण प्रदेश में एक दिवसीय कार्य बहिष्कार किया जाएगा। उसके बाद भी सरकार यदि लंबित मांगों का निराकरण नहीं करती तो 13 अगस्त से सम्पूर्ण प्रदेश में कार्य बहिष्कार आंदोलन किया जाएगा।

Posted By: Lalit Katariya