Bhopal Art And Culture: गमक में साहित्यिक सांगीतिक प्रस्तुति के अंतर्गत की राष्ट्र वंदना

Updated: | Sat, 31 Jul 2021 10:06 AM (IST)

भोपाल (नवदुनिया रिपोर्टर)। गमक श्रृंखला अंतर्गत शुक्रवार को साहित्य अकादमी द्वारा साहित्यिक सांगीतिक प्रस्तुति के अंतर्गत राष्ट्र वंदना कार्यक्रम में प्रदेश के कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। मंच संचालन डॉ प्रार्थना पंडित भोपाल ने किया।

कार्यक्रम में रचनापाठ की शुरुआत आरती गोस्वामी ने अपनी रचना शस्य श्यामला भारत भूमि का वंदन सदा विजय बोलो, शोणित ने सींचा जिस वसुधा को उसका अभिनंदन अजय बोलो... से की। उसके बाद हिमांशु भावसार ने पावन पुण्यधरा ये माटी शत-शत इसे प्रणाम रे, कृष्ण कन्हैया की ये भूमि यहां पर जन्में राम रे..., गौरव साक्षी ने न मेरे मन में इष्टजन आए, न प्रभु आपका भजन आए..., दुष्यंत दीक्षित ने राष्ट्र यज्ञ की इस बेला में, तुम भी तो कुछ अंशदान दो, खोए अपने ही स्वरूप को, एक नया अभिमान भान दो, राजेकिशोर वाजपेयी ने बनी नीतियां, चली कहां थीं, क्योंकि नीयत ठीक नहीं थी..., अखिलेश शर्मा ने कौन कहता है धरा पर देशभक्तों की कमी है, देखने वाले दृगों में, धूल कुछ ज्यादा जमी है..., मोहन नागर ने भस्म-भभूति माथे पर, फिर उनकी आज धरूं... रचना सुनाई। इसी प्रकार प्रार्थना पंडित ने आज बड़ा बेगाना लागे, जिस आंगन में खेला हूं, सरहद से है चिट्ठी आयी, मां मैं बहुत अकेला हूं..., एवं देश के प्रख्यात कवि देवकृष्ण व्यास ने भारत अखंड बने, शक्ति में प्रचंड बने, हो सके तो आप यह यत्न बन जाइये... छंद पाठ से प्रस्तुति को विराम दिया।

गमक में आज: शाम सात बजे से भोजपुरी साहित्य अकादमी की ओर से केएल पांडेय, लखनऊ द्वारा हिंदुस्तानी संगीत में ठुमरी एवं 'बदलते स्वररूप" विषय पर एकाग्र परिचर्चा एवं संजीव सिन्हा, जबलपुर द्वारा कजरी गायन की प्रस्तुति होगी, जिसका प्रसारण विभाग के यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज पर लाइव किया जाएगा।

Posted By: Lalit Katariya