Bhopal Arts and Culture News: गमक के मंच से गजलों की गूंज के साथ खुशनुमा हुई शाम

Updated: | Fri, 06 Aug 2021 08:02 AM (IST)

Bhopal Arts and Culture News: भोपाल (नवदुनिया रिपोर्टर)। मप्र शासन के संस्‍कृति विभाग की बहुविध कलानुशासन संबंधी गतिविधियों पर एकाग्र 'गमक' श्रृंखला के अंतर्गत गुरुवार को मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की ओर से 'शाम-ए-गजल' कार्यक्रम में ग्‍वालियर की नीलिमा शर्मा एवं भोपाल के जावेद उस्मानी ने एक से बढ़कर एक गजलें प्रस्‍तुत करते हुए ऑनलाइन श्रोताओं की शाम खुशनुमा बना दी।

शुरुआत में उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। उसके बाद डॉ. नीलिमा शर्मा ने बहादुर शाह जफर की गजल - 'बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी, जैसी अब है तेरी महफिल कभी ऐसी तो न थी...' से अपनी प्रस्‍तुति का आगाज करते हुए श्रोताओं को दाद देने के लिए मजबूर कर दिया। इसके बाद उन्‍होंने बशीर बद्र- आंखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा, कश्ती के मुसाफिर ने समंदर नहीं देखा..., फैज- राज-ए-उल्फत चुप के देख लिया, दिल बहोत कुछ जला के देख लिया..., गोपाल दास नीरज की गजल- जब चले जाएंगे हम लौट के सावन की तरह... प्रस्तुत करते हुए समां बांध दिया। डॉ. नीलिमा शर्मा गजल और लाइट म्युजिक की दुनिया में जाना-पहचाना नाम हैं।

इसके बाद जावेद उस्मानी ने मंच संभाला और उन्होंने जां निसार अख्तर की गजल- तू इस कदर अपने करीब लगता है, तुझे अलग से सोचूं अजीब लगता है..., कैफ भोपाली- ये मिजाजे नाज के वफा हुआ उन्हें मुझे, मेरी गुफ्तगू मेरी, जुस्तजू, मेरा इंतेजार आजकल..., गालिब- हर एक बात पे कहते हो तुम के तू क्या है, तुम्हीं कहो के ये अंदाजे गुफ्तगू क्या है... एवं शकील बंदायूनी की - हर जफा हर सितम गंवारा है सिर्फ कह के तू हमारा है... जैसी अलग-अलग मिजाज की गजलें पेश करते हुए ऑनलाइन श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। जावेद उस्‍मानी भोपाल के जाने माने गजल गायक हैं। उन्‍होंने महज छह साल की छोटी उम्र से ही गायन की विधिवत शिक्षा प्राप्त करना प्रारंभ कर दिया था।

गमक में आज : शुक्रवार को शाम साज बजे से साहित्य अकादमी की ओर से सांगीतिक प्रस्तुति के अंतर्गत भारती दीक्षित और साथी, इंदौर द्वारा कथा पन्ना धाय की प्रस्तुति होगी, जिसका प्रसारण विभाग के यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज पर लाइव किया जाएगा।

Posted By: Ravindra Soni