Bhopal Education News: निजी स्कूल बच्चों को स्कूल भेजने के लिए दबाव बना रहे दबाव, अभिभावकों में आक्रोश

Updated: | Thu, 21 Oct 2021 01:31 PM (IST)

भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ अभिभावक फिर से एकजुट हो गए हैं। पालक महासंघ मप्र ने निजी स्कूलों से अभिभावकों को होने वाली समस्याओं के निदान के संबंध में गुरुवार को कलेक्टर अविनाश लवानिया को ज्ञापन सौंपा। पालक महासंघ ने मांग की है कि कोरोना महामारी के संबंध में राज्य शासन के आदेशों के विपरीत स्कूलों द्वारा आनलाइन कक्षाएं बंद की जा रही है और विभिन्न तरीकों से बच्चों को स्कूल आने के लिए बाध्य किया जा रहा है। कई स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षा पूर्णत: बंद कर दी है। स्कूलों द्वारा मप्र शासन और उच्च न्यायालय द्वारा रोक के बावजूद भी सत्र 2021-22 में फीस में वृद्धि की गई है और शिक्षण शुल्क के अलावा अन्य शुल्क जैसे स्पोर्ट फीस, पुस्तकालय, एनुअल फीस को शिक्षण शुल्क फीस में जोड़ दिया गया हैं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर स्कूलों की तीन साल की फीस की जनकारी दर्ज कराने के संबंध में बनाए गए पोर्टल में स्कूलों द्वारा आधी अधूरी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही मप्र शासन के आदेश के अनुसार लेखा-जोखा भी प्रस्तुत नहीं किया गया है।

अभिभावकों ने निजी स्‍कूलों की इन मनमानियों को लेकर आक्रोश जताते हुए कहा कि ऐसी स्थितियों में अभिभावक अपनी शिकायत करने में असमर्थ है। उन्‍होंने मांग की कि अभिभावकों को यह जानकारी उपलब्ध कराई जाए कि शिकायत कब, कहां और कैसे व किसको करें। इसके लिए टोल-फ्री नंबर या ईमेल एड्रेस क्या होगा। साथ ही अभिभावकों को विश्वास दिलाना होगा कि उनके द्वारा की गई शिकायत गुप्त रहेगी। मप्र शासन और उच्च न्यायालय द्वारा रोक के बावजूद भी सत्र 2020-21 में शिक्षण शुल्क के अलावा अन्य मदों में राशि वसूल की गई है और विभाग के अधिकारियों को जानकारी प्रदान करने के बावजूद भी उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कलेक्टर ने पालक महासंघ की मांगों के निराकरण का आश्वासन दिया।

अभिभावकों की ये भी हैं शिकायतें

- अभिभावकों पर गंभीर आर्थिक संकट के बावजूद भी स्कूलों द्वारा अनाधिकृतरूप से विलंब शुल्क देने का दबाव बनाया जा रहा है।

- स्कूलों द्वारा फीस प्राप्त न होने पर आनलाइन कक्षा, परीक्षा रिजल्ट एवं टीसी से वंचित किया जा रहा है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय एवं मप्र शासन का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी स्थिति में बच्चों को पढ़ाई से वंचित नहीं किया जा सकता है।

- अभिभावकों पर निजी स्कूलों द्वारा निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है। एनसीईआरटी की किताबें भी खरीदने के लिए कहा जा रहा है।

Posted By: Ravindra Soni