Bhopal literature News: देवेंद्र दीपक के साहित्य में जीवन दर्शन की भरमार : प्रो. अरुण कुमार भगत

Updated: | Sun, 01 Aug 2021 03:56 PM (IST)

भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। डॉ. देवेंद्र दीपक के साहित्य में सूक्तियों की भरमार है। इन सूक्तियों में जीवन-दर्शन छिपा हुआ है। इन पर बड़े स्तर पर शोध होना चाहिए। उनकी रचना या लेखन में सांस्कृतिक और सामाजिक उन्मेष के साथ सामाजिक समरसता है। ये बातें बिहार लोकसेवा आयोग के सदस्य और महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो (डॉ.) अरुण कुमार भगत ने कहीं। वह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र द्वारा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. देवेंद्र दीपक के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आयोजित राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि समाज को 'पानी से नहाया हुआ व्यक्ति स्वच्छ होता है और पसीने से नहाया व्यक्ति शुद्ध होता है और अपनी कलम से खाई नहीं कुआं खोदो, ताकि लोगों की प्यास बुझे' जैसे विचार देने वाले डॉ. दीपक निश्चित ही काव्य पुरुष हैं। प्रो. भगत ने डॉ देवेंद्र के व्‍यक्‍तित्‍व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान शासकीय सेवा की दहशत की सींखचों में घिरे होने के बावजूद उन्‍होंने कलम की धार कम नहीं होने दी। उन्होंने अपनी रचना के आईने में लोकतंत्र के दमन को उकेरा। आपातकाल पर लिखने वालों में वे अग्रणी रहे।

इस अवसर पर अपने उद्बोधन में वरिष्ठ पत्रकार और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने कहा कि देवेंद्र दीपक का रचना संसार वैदिक संस्कृति और इतिहास का प्रतिनिधित्व करता है। यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है, इसलिए हमारा दायित्व है कि उसे सामने लाएं। यह कार्योत्सव एक साहित्योत्सव है। वहीं स्वागत वक्तव्य देते हुए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि यह बहुत सौभाग्य की बात है कि हमें उनकी 90वीं जयंती मनाने का सौभाग्य मिल रहा है। उन्होंने अपनी रचनात्मकता से प्रभावित किया है। वे धारा के विपरीत हमेशा खड़े रहे हैं। वे मेरे जैसे छोटे और नौजवान को भी बिठाकर सिखाते थे।

कार्यक्रम के वक्ता और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ज्योति ने कहा कि डॉ. दीपक एक ऐसे वृक्ष हैं जिनकी काव्य, गद्य, शासकीय और शिक्षकीय गुण शाखाएं हैं। उनके शिक्षकीय गुण का जितना बखान किया जाए, कम है। उन्होंने अपनी रचना 'मास्टर धर्मदास' के जरिए एक शिक्षक की पीड़ा और छात्र के प्रति उसके स्नेह को बताया है। डॉ. दीपक वर्तमान और आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा के सागर हैं। मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. नंदकिशोर पांडेय ने कहा कि समकालीन कवियों में देवेंद्र दीपक शामिल हैं। जिन विषयों पर कवि माखनलाल चतुर्वेदी ने लिखा, रतौना में बूचड़खाना खुलने के खिलाफ लगातार लिखा। उसी मध्यप्रदेश की धरती से देवेंद्र दीपक ने गौ उवाच लिखा। उन्होंने गद्य और पद्य लेखन को एक भारतीयता की दृष्टि दी है।

Posted By: Ravindra Soni