Bhopal News: कोविड के कारण उत्पन्न हुई शिक्षा की चुनौतियों को बच्चे व शिक्षक मिलकर अवसर में बदलेंगे

Updated: | Sat, 25 Sep 2021 03:22 PM (IST)

Bhopal News: भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। डेढ साल बाद स्कूल खुले हैं और जो चुनौतियां सामने आईं हैं उनसे निपटना हम सब की जिम्मेदारी है। कोविड के कारण अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग अनुभव हुए हैं। बच्चे और शिक्षक इन परिस्थितियों में मुख्य एक्टर हैं। मुझे उम्मीद है कि हम सब मिलकर शिक्षा की इस चुनौती को अवसर के रूप में बदलेंगे और आगे बढ़ेंगे। यह बात चाइल्ड राइट्स आब्जर्वेटरी की अध्यक्ष निर्मला बुच ने कही। चाइल्ड राइट्स आब्जर्वेटरी और यूनीसेफ द्वारा सीखने-सिखाने में आ रही चुनौतियों पर बच्चों और शिक्षकों से संवाद विषय पर एक आनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई। वहीं यूनीसेफ की शिक्षा विशेषज्ञ एफए जामी ने अपना प्रस्तुतिकरण देते हुए शिक्षकों और बच्चों से आग्रह किया कि वे खुलकर जो चुनौतियां सामने आ रही हैं उनके विषय में खुलकर बतायें ताकि आपकी समस्याओं के निराकरण की दिशा में आगे बढ़ा जा सके। वहीं राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य ब्रजेश चौहान ने शिक्षकों की समस्याओं से सहमति जताते हुए कहा कि उनके परिश्रम से ही बच्चे पढ़ने में सक्षम हो पा रहे हैं। कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के सामने कठिनाईया हैं वे पुराना सब भूल गए हैं। पहली से तीसरी कक्षा के बच्चे तो पहली बार स्कूल आ रहे हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में शिक्षकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता और परिजनों से जुड़ें। उनसे बात करें तब ही गांव के बच्चे स्कूल आ पाएंगे। शिक्षकों के साथ-साथ माता-पिता की भूमिका भी अहम है। उन्होंने शिक्षकों और बच्चों को आश्वस्त किया कि वे उनकी पाठ्यक्रम कम करने और अचीवमेंट परीक्षाओं को बाद में आयोजित करने के संबंध में शासन से बातचीत करेंगे।

कार्यक्रम का संचालन यूनीसेफ के संचार विषेषज्ञ अनिल गुलाटी ने किया। उन्होंने कहा कि आज की इस कार्यशाला में बच्चों और शिक्षकों ने सीखने-सिखाने में आ रहीं चुनौतियों की जो जानकारी दी है। वह बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह कार्यशाला बच्चों और शिक्षकों की समस्याओं को जानने के लिए आयोजित की गई है। इस संबंध में चाइल्ड राइट्स आॅब्जर्वेटरी और मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग शासन और स्कूल शिक्षा विभाग में अपने विचार रखेंगे।

Posted By: Lalit Katariya