Bhopal News: वाटर प्लस की परीक्षा में इंदौर ने मारी बाजी, भोपाल ने दोबारा सत्यापन का किया आग्रह

Updated: | Fri, 22 Oct 2021 07:20 AM (IST)

Bhopal News:भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। वाटर प्लस की परीक्षा में शहर एक बार फिर नाकाम साबित हुआ है। ऐसा इसलिए, क्योंकि सीवर कनेक्टिविटी, बेकार पानी को दोबारा उपयोग करने लायक बनाने जैसे अन्य पैमानों पर शहर के इंतजाम खरे नहीं उतरे हैं। लिहाजा, स्वच्छ भारत मिश्ान (श्ाहरी) के लिए हुए सर्वे में भोपाल को वाटर प्लस का प्रमाण्ा पत्र नहीं मिल पाया है।

दरअसल, पिछले दो साल से भोपाल और इंदौर वाटर प्लस के लिए दावा कर रहे थे, लेकिन दोनों को ही यह तमगा नहीं मिला। दोनों शहरों को ओडीएफ डबल प्लस से संतोष करना पड़ा था। हालांकि, इस बार इंदौर ने बाजी मार ली और देश का पहला वाटर प्लस शहर बनने में कामयाब रहा। भोपाल ऐसा नहीं कर पाया, जबकि नगर निगम के अफसर इसकी पूरी उम्मीद लगाए हुए थे। अब नगर निगम ने सत्यापन का एक मौका और देने का लिखित में अभ्यावेदन केंद्र सरकार को भेजा है। बताया जा रहा है कि निगम ने राज्य सरकार के जरिये केंद्र को दोबारा प्रस्तुतिकरण्ा भेजा है। वहीं भोपाल के कुछ रिकार्ड्स और दस्तावेजों पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया गया है। इतना ही नहीं, वाटर प्लस सर्टिफिकेशन के लिए फिर से सत्यापन कराने की भी बात कही है। बता दें कि वाटर प्लस की चयन प्रक्रिया में देश के 84 शहरों ने आवेदन किए थे। इसमें से सिर्फ 33 शहरों को जमीनी सत्यापन के लिए उचित पाया गया था। इन शहरों में इस साल हकीकत जांचने के लिए करीब तीन महीने पहले टीमें घूमी थीं और मौके से ही फोटो खींचकर अपलोड की थीं।

ऐसे बन पाते हैं वाटर प्लस

स्वच्छता भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत देश के शहरों का विभिन्ना स्वच्छता मानकों के आधार पर परीक्षण किया जाता है। इसमें ओडीएफ प्लस, ओडीएफ डबल प्लस और वाटर प्लस की श्रेणियां हैं। वाटर प्लस का प्रमाण-पत्र उन शहरों को दिया जाता है, जिन्होंने ओडीएफ डबल प्लस के सभी मानकों को पूर्ण किया हो। साथ ही आवासीय और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले अपशिष्ट मल-जल को उपचार के बाद ही पर्यावरण में छोड़ा जाता हो। सीवर कनेक्टिविटी 50 फीसदी से ज्यादा हो, कम से कम 25 फीसदी बेकार पानी का दोबारा उपयोग किया जाता हो। नालों के पानी में गंदगी न आती हो। साथ ही सार्वजनिक श्ाौचालय उच्च सुविधाओं व गुणवत्ताओं के हों।

सर्वे में 1300 नंबर ओडीएफ, वाटर प्लस के स्वच्छ सर्वेक्ष्क्षण 2021 के लिए कुल छह हजार नंबर तय किए गए हैं। इसमें से 20 फीसद से ज्यादा अंक खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) और वाटर प्लस से मिलेंगे। यानी 1300 नंबर का फैसला इससे होगा। सर्वे की रैंकिंग में यह अहम भूमिका निभाएगा, इसलिए भोपाल नगर निगम वाटर प्लस पाने की भरसक कोशिश कर रहा है।

Posted By: Lalit Katariya