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Bhopal News: सजा के दौरान सीखा हुनर, जेल में रहकर बंदी बना रहे चंदेरी और महेश्वरी साड़ी

Updated: | Tue, 19 Jan 2021 03:32 PM (IST)

भोपाल, नवदुनिया स्टेट ब्यूरो। कोई भी हुनर कभी बेकार नहीं जाता। यह बात मध्य प्रदेश के सागर स्थित केंद्रीय जेल में बंदी रहे लोग साबित कर रहे हैं। जेल में आचार्य विद्या सागर के उस विचार को मूर्त रूप दिया रहा है, जिसमें वे बंदियों के पुनर्वास और रोजगार की चिंता करते हैं। यहां बंदियों को हथकरघा का प्रशिक्षण 2018 से दिया जा रहा है। प्रशिक्षित बंदी 54 हथकरघा पर चंदेरी और महेश्वरी साड़ी बना रहे हैं।

इन साड़ियों को सक्रिय सम्यक दर्शन सहकार संघ ट्रस्ट बेचता है और प्राप्त आय बंदियों के खाते में जमा की जाती है। हुनरमंद बंदी इस कार्य से आठ से नौ हजार स्र्पये प्रतिमाह कमा लेते हैं। खाते में जमा राशि बंदी के स्वजन बंदी की सहमति से निकाल सकते हैं। यानी जेल में रहकर भी बंदी का परिवार पल रहा है।

जानकारी के अनुसार एक जनवरी 2018 से बंदियों को हथकरघा का प्रशिक्षण देने की शुस्र्आत हुई थी। पहले 10 हथकरघा लगे थे। दो-तीन महीने में बंदी इस काम में दक्ष हो गए तो फिर हथकरघा की संख्या आवश्यकतानुसार बढ़ाई गई। शेड की व्यवस्था भी जैन समाज की ओर से की गई। करीब 70 लाख की लागत से शेड का निर्माण किया गया। बंदियों द्वारा तैयार साड़ियां कारोबारियों के साथ हुए अनुबंध के तहत दी जाती हैं। यहां काम करने वाले बंदियों को उनके कौशल के अनुसार भुगतान किया जाता है।

बीते तीन वर्ष में बंदियों के खाते में 16 लाख स्र्पये जमा कराए गए हैं। इसके अलावा जेल से रिहा होने वाले बंदी को हथकरघा, धागा और उससे संबंधित सामग्री दी जाती है, ताकि वह खुद का काम शुरू कर सके। इसकी लागत करीब 50 हजार स्र्पये होती है। घर जाने पर ये जो साड़ियां तैयार करते हैं, उन्हें भी ट्रस्ट बेचने में मदद करता है। प्रशिक्षण शुरू करने से लेकर अब तक रिहा दो बंदी घर से काम कर रहे हैं।

जेल से निकलने के बाद नहीं रहते बेरोजगार

जेल में हथकरघा से संबंधित कार्य में दक्ष होने और जेल से बाहर निकलने पर उपहार स्वरूप सामग्री मिलने से ये लोग बेरोजगार नहीं रहते हैं। इन लोगों को अपना उत्पाद बाजार में बेचने की भी स्वतंत्रता है, लेकिन बाजार की जानकारी नहीं होने पर ट्रस्ट को भी यह लोग साड़ियां दे सकते हैं। ट्रस्ट अनुबंध के तहत इन्हें कारोबारियों को देता है और राशि साड़ी बुनने वाले को दे दी जाती है।

बंदियों के पुनर्वास का है लक्ष्य

इस कार्य के पीछे मुनिश्री का दर्शन है। बंदियों के पुनर्वास और उनके रोजगार का बड़ा लक्ष्य इस माध्यम से प्राप्त हो रहा है। बंदियों के साथ उनके स्वजनों को भी राहत मिल रही है।

ब्रह्मचारिणी रेखा दीदी, प्रतिनिधि, सक्रिय सम्यक दर्शन सहकार संघ ट्रस्ट

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay
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