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Bhopal News: रवींद्र भवन में ठाकुर रणमत सिंह के मंचन से साकार हुई अंग्रेजों के खिलाफ बघेलखंड में हुई क्रांति

Updated: | Sun, 07 Mar 2021 07:15 AM (IST)

Bhopal News: भोपाल(नवदुनिया रिपोर्टर)। गमक श्र्ाृंखला की सप्ताहांत प्रस्तुति के अंतर्गत रवींद्र भवन में शनिवार को पीपल्स थिएटर कल्चरल एजूकेशन एंड वेलफेयर समिति के कलाकारों ने सिंधु धौलपुरे के निर्देशन में नाटक 'ठाकुर रणमत सिंह' का मंचन किया। आजादी की लड़ाई में ऐसे कई अनगिनत योद्धाओं ने भाग लिया था, जिनसे आज भी देश के लोग अनभिज्ञ हैं। इनकी वीरता और शहादत की कहानियां लोक कथाओं के रूप में प्रचलित हैं। ऐसे ही एक वीर योद्धा थे बघेलखंड के ठाकुर रणमत सिंह। इनका चरित्र काफी रोचक हैं। उनके जीवन से प्रेरित होकर निर्देशक ने युवा पीढ़ी को ठाकुर रणमत सिंह की वीरता और उनके चरित्र से रूबरू करने का प्रयास नाटक के माध्यम से किया हैे। प्रस्तुति में बघेली बोली और संगीत ने मिठास घोली।

अंग्रेजों का खजाना लूटने पर होती है रणमत सिंह को फांसी

ठाकुर रणमत सिंह की कहानी 1857 की क्रांति से शुरू होती है। ठाकुर रणमत सिंह भी अंग्रेजों के खिलाफ एक क्रांतिकारी के रूप में खड़े हो जाते हैं, वे योजनाबद्ध तरीके से अंग्रेज सेना में लेफ्टिनेंट बन खजाना लूटते हैं। इसे लेकर 300 सिपाहियों के साथ चित्रकूट के जंगल में छिप जाते हैं। यहां उनका साथी बलदेव अंग्रेजों के गुप्तचर का काम करता है। वह रणमत सिंह से कहता है कि रीवा महाराज ने आपको याद किया है। स्वागत करना चाहते हैं आपका। महाराज का कहना है, मेरा बेटा देश के लिए इतना बड़ा काम कर रहा है, और क्या मैं उसका हौसला बढ़ाने के लिए कुछ भी नहीं कर सकता। रणमत सिंह बलदेव पर भरोसा कर महाराज की आज्ञा का पालन करने स्वागत के लिए कोठी पहुंचते हैं तो वहां पर अंग्रेज अध्ािकारी द्वारा रणमत को गिरफ्तार कर लिया जाता है। एक अगस्त 1859 को उन्हें अनंत चतुर्दशी के दिन फांसी की सजा दे दी जाती हैं और उनके साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाता है।

Posted By: Ravindra Soni
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