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Bhopal News: आयुष्‍मान कार्ड पर इलाज करने से चिरायु अस्‍पताल का इंकार, कारण पूछा तो मैनेजर बोला- बाहर फेंको इसे

Updated: | Sun, 16 May 2021 09:07 PM (IST)

हम आपको नहीं सरकार को जवाब देंगे, गार्ड इसे बाहर फेंको यह कहकर चिरायु के मैनेजर ने मरीज के परिजन को बाहर निकाला

Bhopal News: भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि। कुछ निजी अस्‍पताल संचालकों की मनमानी व अस्‍पतालों में भर्ती मरीजों के परिजनों से मनमानी राशि वसूलने की खबरों के बीच चिरायु अस्‍पताल का एक वीडियो वायरल हुआ है। वहीं पूरे घटनाक्रम पर डॉक्‍टर गोयनका ने वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है।

मरीज के परिजन और चिरायु अस्‍पताल के मैनेजर गौरव बजाज के बीच आयुष्‍मान कार्ड को लेकर हुए विवाद का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ है। इसके बाद रविवार को मरीज के परिजन का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें चिरायु अस्‍पताल प्रबंधन द्वारा राशि जमा करने का दबाव बनाए जाने की बात कही जा रही है।

दरअसल, डीआईजी बंगला निवासी योगेश बलवानी ने 19 अप्रैल को अपनी मां को कोरोना का इलाज कराने के लिए चिरायु हॉस्पिटल में भर्ती किया था। मरीज के पास आयुष्मान भारत योजना का कार्ड भी है। इसके बाद भी हॉस्पिटल प्रबंधन ने उपचार के लिए 3 लाख रुपये जमा करवा लिए।

उपचार के दौरान बीते शुक्रवार को जब मरीज के बेटे योगेश बलवानी ने हॉस्पिटल प्रबंधन से कहा कि उनके पास आयुष्मान भारत योजना का कार्ड है तो मैनेजर गौरव बजाज ने साफ इनकार कर दिया कि हमें ऊपर के आदेश हैं आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार नहीं करेंगे,जो करना हो कर लो।

इतना कहकर गौरव बजाज गार्ड से कहते हैं कि इस आदमी को बाहर कर दो। इतना ही नहीं इस बारे में जब योगेश ने डॉक्टर गोयनका से बात की तो उन्होंने भी दुत्कारते हुए कहा कि तुझे सीएम के पास शिकायत करना है कर दे, कलेक्टर के पास शिकायत करना है कर दे। हम आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार नहीं करेंगे

( जैसा कि योगेश ने बातचीत में बताया?

योगेश ने बताया कि शनिवार की शाम को उपचार के दौरान उनकी मां रूकमणी बलवानी की मौत हो गई,इसके बाद भी हॉस्पिटल प्रबंधन 3 लाख रुपये और जमा कराने का दबाव बना रहा है। रुपये जमा नहीं कर पाने के कारण हॉस्पिटल ने मरीज के डिस्चार्ज पेपर और मृत्‍यु प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया है। वीडियो वायरल होने के बाद भी मरीज को अभी तक शासन से कोई राहत नहीं मिली है।

एक तरफ तो मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार कोरोना पीड़ितों के उपचार की व्यवथा कर रही है वहीं दूसरी तरफ निजी चिकित्सालय अपनी मन मर्जी करके सरकार की मंशा पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं। विगत दिनों राजधानी के निजी अस्‍पतालों द्वारा भारी भरकम बिल वसूलने के मामलों का खुलासा होने के बाद मुख्‍यमंत्री ने संज्ञान लेकर आयुष्‍मान कार्ड से इलाज अनिवार्य किया था, ताकि सभी को इसका लाभ दिया जा सके।

इन अस्‍पतालों पर हुई सबसे पहले कार्रवाई

उबंटू हॉस्पिटल होशंगाबाद रोड

भोपाल में सबसे पहले उबंटू हॉस्पिटल होशंगाबाद रोड के खिलाफ मेंटू सिन्‍हा की शिकायत पर कार्रवाई की गई थी। बिल दो लाख 1008 रुपये का बनाया गया है। जब जांच की गई तो बिल महज एक लाख 30 हजार रुपये का निकला। बाद में अस्‍पताल प्रबंधन ने 71 हजार रुपये लौटाए थे।

सिटी सुपर स्‍पेशलिटी अस्‍पताल गौतम नगर

इस अस्‍पताल संचालक ने ऑक्‍सीजन की व्‍यवस्‍था करने के नाम पर मरीज शोभा मालवीय के बिल में 4.50 लाख रुपये जोड दिए गए थे। कुल 12 लाख रुपये का बिल बनाया गया था। करीब 20 दिन का इतना बिल बनने की शिकायत कलेक्‍टर अविनाश लवानिया से की गई थी। जिसकी जांच एसडीएम विनीत तिवारी ने की तो अस्‍पताल प्रबंधन ने छह लाख रुपये वापस कर दिए। इस तरह छह लाख रुपये प्रशासन ने माफ करवाया गया था। राजधानी में आक्‍सीजन की कमी के कारण पहली बार मरीज की मौत का मामला भी इसी अस्‍पताल में सामने आया था।

आरकेडीएफ अस्‍पताल होशंगाबाद रोड

29 अप्रैल को भर्ती हुए मनोज तनवानी के परिजनों ने शिकायत की थी कि छह दिन का बिल एक लाख 65 हजार रुपये बनाया गया है। परिजनों के पास पैसे नहीं थे लेकिन चंदा करके पैसे जुटाए गए। वहीं शिकायत एसडीएम क्षितिज शर्मा से की गई। जांच के बाद एसडीएम ने 50 हजार रुपये की राशि वापस कराई थी।

आठ घंटे के वसूले थे 50 हजार रुपये

भानपुर स्थित आयुष्‍मान मल्‍टीकेयर अस्‍पताल ने अशोका गार्डन निवासी प्रणव कुमार आनंद से पिता के इलाज के नाम पर आठ घंटे के 50 हजार रुपये वसूले थे। जब यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आया तो दूसरे दिन अस्‍पताल प्रबंधन ने 25 हजार रुपये की राशि वापस कर दी थी।

रूद्राक्ष अस्‍पताल, कोलार

यहां जांच में पाया गया था कि चार कोरोना संक्रमित मरीजों से 40 फीसद से ज्‍यादा राशि वसूली गई है। बाद में प्रबंधन ने अपनी गलती स्‍वीकार करते हुए मरीजों से माफी मांगी और अतिरिक्‍त राशि वापस की। बन्‍ने सिंह यादव के निधन के बाद अस्‍पताल ने ज्‍यादा पैसा लिया था लेकिन जांच होने के बाद 65 हजार रुपये लौटाए गए।

Posted By: Ravindra Soni
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