राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल के चलते प्रदेश की 5000 बैंक शाखाओं में लग सकते हैं ताले, अभी से निपटा लें काम

Updated: | Sun, 05 Dec 2021 04:17 PM (IST)

भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। बैंकों से जुड़े कोई काम लंबित हो तो उन्हें जल्द निपटा लें। 16 और 17 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल है। उसके एक दिन बाद रविवार अवकाश है। इस तरह एक दिन के अंतराल बैंकें तीन दिन तक बंद रहेंगे। लंबित काम करना मुश्किल हो सकता है। हड़ताल के कारण प्रदेश की 5000 से अधिक बैंक शाखाओं में ताले पड़ सकते हैं। यह स्थिति तब बनेगी, जब सभी बैंक कर्मी काम छोड़कर बाहर निकलेंगे। यदि बैंककर्मियों ने हड़ताल का समर्थन नहीं किया तो कामकाज प्रभावित नहीं होगा, हड़ताल के दिनों में भी काम होगा। ये बैंककर्मी निजीकरण के खिलाफ है और राजधानी भोपाल में अभी से हड़ताल के समर्थन में उतर गए हैं। शनिवार को नीलम पार्क में बैंककर्मियों ने धरना दिया है। जिसमें आरोप लगाए हैं कि केंद्र सरकार राष्ट्रीयकृत बैंकों को निजी हाथों में देनी जा रही है। इसका व्यापक स्तर पर नुकसान होगा। उपभोक्ता भी परेशान होंगे और बैंक कर्मचारी, अधिकारी भी प्रभावित होंगे।

राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल को लेकर मप्र में यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन्स की तरफ से चेतावनी दी गई है। फोरम के वीके शर्मा और संजीव सबलोक ने बताया कि मप्र में 12 बैंकों की करीब 5000 शाखाएं हैं। इनमें 40 हजार से अधिक अधिकारी, कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। बड़ी बात यह है कि इसमें अधिकारी और कर्मचारी दोनों शामिल है। दो दिन की हड़ताल से अरबों रुपये का कारोबार प्रभावित होगा। फोरम के वीके शर्मा ने बताया कि वैसे ही बैंकों में सेवानिवृत्ति के कारण तेजी से पद खाली हो रहे हैं। कामकाज प्रभावित है जो अधिकारी, कर्मचारी हैं उन पर काम का अतिरिक्त दबाव है। यदि बैंकों को निजी हाथों में दिया जाता है तो स्थ्ािति और खराब होगी। आउटसोर्स पर काम कराया जाने लगेगा। फोरम के संजीव सबलोक का कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन कम होगा। उन्हें सुविधाएं भी नहीं दी जाएगी, उनका शोषण होगा। बेरोजगारी बढ़ेगी, जो अधिकारी, कर्मचारी अभी काम कर रहे हैं उनका भविष्य पर भी असुरक्षित होगा। वीके शर्मा ने बताया कि बैंकों के निजीकरण का प्रस्तावित बिल संसद के शीतकालीन सत्र में चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया है। सरकार के इस कदम से अधिकारी, कर्मचारियों में और आक्रोश बढ़ गया है।

Posted By: Lalit Katariya